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हल्दीघाटी युद्ध में प्रताप के शौर्य आलोक में आयोजित “शिल्प प्रदर्शनी” का राज्यपाल बागडे ने शुभारंभ किया

महान इतिहास सदा ही ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है-राज्यपाल

जयपुर, (14 जून 2026)। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने रविवार को मूर्तिकार महावीर भारती की पहल पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप द्वारा हल्दीघाटी युद्ध विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के आलोक में आयोजित “शिल्प प्रदर्शनी” का शुभारंभ किया। राज्यपाल ने इस दौरान वहां हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े योद्धाओं की सिरजी कलाकृतियां का अवलोकन कर उनकी सराहना की।

राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की हाथी पर सवार प्रतिमा और हल्दीघाटी युद्ध की स्मृति को जीवंत करती प्रतिमाओं का अवलोकन करते हुए कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप और अकबर के मध्य हुआ परंतु अकबर सामने नहीं आया। बागडे ने कहा कि महान इतिहास से ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास और परम्परा के साथ संस्कृति को भुलाने के निरंतर प्रयास किए। ऐसे पाठ्यक्रम बनाए जो भारतीयता से हमें दूर करे। उन्होंने हल्दीघाटी युद्ध के साथ मेवाड़ की गौरवमय परंपराओं के आलोक में सृजित प्रतिमाओं को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप का समय एक होता तो स्थितियां बहुत अच्छी होती।

राज्यपाल ने कहा कि मेवाड़ वीरों की भूमि थी। इसीलिए मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि अरब जब गांधार, अफगानिस्तान, सिंध को हराते हुए मेवाड़ की ओर आये तो बप्पा रावल ने उन्हें भारत से खदेड़ा। उन्होंने कहा कि बप्पा रावल का पराक्रम इतना था कि जहाँ वह रुके उस स्थान का नाम रावल पिंडी हुआ।

राज्यपाल ने कहा कि अकबरनामा इतिहास नहीं है, दरबारी इतिहास है। इसमें हमारे योद्धाओं, वीरांगनाओं के शौर्य का जिक्र ही नहीं है। उन्होंने राजस्थान की किरण कुमारी द्वारा स्त्री स्मिता के लिए अकबर पर किए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अकबर को मारने वाली थी पर उसके द्वारा माफी मांगने पर उसे छोड़ दिया गया।

इस अवसर पर नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी, विधायक गोपाल शर्मा भी उपस्थित रहे। इससे पहले मूर्तिकार महावीर भारती ने बताया कि उनके स्तर पर एक सौ से अधिक महाराणा प्रताप की प्रतिमाएं देश विदेश में लगाई गई हैं। उन्होंने शिल्प प्रदर्शनी के बारे में जानकारी दी।

इससे पहले राज्यपाल ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धा निवेदित की।

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