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आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्थान एवं वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर पोषण वाटिकाएँ विकसित करेंगे – महिला एवं बाल विकास मंत्री
जयपुर, (29 जनवरी 2026)। महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्थान एवं वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर पोषण वाटिकाएँ विकसित करेंगे। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 में पोषण अभियान के अंतर्गत नवाचार के रूप में प्रदेश में पोषण वाटिकाएँ विकसित की गई थीं तथा वर्तमान में भी केंद्र सरकार के सहयोग से यह कार्य निरंतर जारी है।
उन्होंने कहा कि सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों एवं राज्य मद से विकसित किये जा रहे आदर्श आगनबाड़ी केंद्रों पर स्थान की उपलब्धता के अनुसार पोषण वाटिकाएँ विकसित की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में 107 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों एवं 242 आदर्श आगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिकाएँ विकसित की जा चुकी हैं। अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी स्थान एवं वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर पोषण वाटिकाएँ विकसित की जाएगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य संदीप शर्मा द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में समय-समय पर वृद्धि की जाती रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार के स्तर पर भी मानदेय एवं अन्य मदों में देय राशि में वृद्धि के लिए राज्य द्वारा अनुरोध किया जाता है एवं राज्य की ओर से भिजवाए जाने वाले एनुअल प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन प्लान में भी आवश्यकतानुसार इस राशि में वृद्धि सम्बन्धी प्रस्ताव भिजवाए जाते है।
इससे पहले विधायक संदीप शर्मा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि कोटा जिले में वर्तमान में 1312 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं, इनमें से 280 आंगनबाड़ी केन्द्र महिला एवं बाल विकास विभाग के भवनों में, 502 किराये के भवनों में एवं 530 अन्य राजकीय व निजी नि:शुल्क भवनों में संचालित हैं।जिलें में 727 आंगनबाड़ी केन्द्र एक कमरे में संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पोषण अभियान में नवाचार के तहत वित्तीय वर्ष-2020-21 में 7686 तथा वित्तीय वर्ष 2021-22 में 6465 आंगनबाडी केन्द्रों पर पोषण वाटिकायें विकसित की गई। उन्होंने इनका जिलेवार विवरण सदन के पटल पर रखा। पोषण वाटिका विकसित किये जाने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदाय में ताजा एवं हरी सब्जियों के प्रति जागरूकता लाना, संतुलित आहार, कुपोषण कम करने एवं बच्चों को साइट विजिट के माध्यम से विभिन्न कृषि तकनीकों के संबंध में ज्ञान संवर्धन करना है। पोषण वाटिकायें विकसित करने के संबंध में जारी किये गए दिशा-निर्देश की प्रति उन्होंने सदन के पटल पर रखी।
उन्होंने बताया कि आंगनबाडी केन्द्रों पर खेल मैदान बनाने के संबंध में विभाग द्वारा कोई भी योजना नहीं चलायी गई है।
उन्होंने प्रदेश में वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को देय मानदेय का विवरण एवं विगत पांच वर्षों में इनके मानदेय में की गयी वृद्धि का विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने जानकारी दी कि आंगनबाड़ी केन्द्र के संचालन के लिए आवश्यक दैनिक सामग्री क्रय हेतु कार्यालय व्यय (आंगनबाडी आवर्तक) उपमद अंतर्गत केंद्र सरकार के नॉर्म्स के अनुसार 2000/- प्रति केन्द्र प्रतिवर्ष, विद्युत बिलों के भुगतान हेतु 500/- प्रति केन्द्र प्रतिमाह एवं मरम्मत के लिए 3000/- प्रति केन्द्र प्रतिवर्ष के हिसाब से राशि परियोजना कार्यालयों के माध्यम से उपलब्ध करवायी जाती है।
इसके अतिरिक्त आंगनबाडी केन्द्र संचालन हेतु भारत सरकार द्वारा अनुमोदित एपीआईपी/बजट प्रावधानों के अंतर्गत प्री-स्कूल किट, मेडीसिन किट, आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के लिए यूनिफॉर्म, ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस, मोबाईल फोन, डेटा प्लान हेतु समय-समय पर परियोजना अधिकारियों को राशि/सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है। इस राशि में वृद्धि केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित एपीआईपी एपीआईपी/बजट प्रावधानों के अनुसार की जाती है।