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कोटा में गूंजीं वंदे मातरम् की स्वर लहरियां, लहराया तिरंगा

‘वंदे मातरम’ राष्ट्र की आत्मा का स्वर- लोकसभा अध्यक्ष

जयपुर, (7 नवम्बर 2025)। राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर शुक्रवार को कोटा जिलें के महाराव उम्मेद सिंह स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम देशभक्ति के जज्बे से सराबोर रहा। भारत माता के वंदन के इस उत्सव में सैकड़ों हाथों में लहराते तिरंगे और स्वर लहरियों के साथ भारत मां का गुणगान और नमन किया गया। इस अवसर पर शहीदों के परिजनों का सम्मान किया गया तथा प्रदर्शनी एवं स्वदेशी मेले का आयोजन भी हुआ।

समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह दिन हम सभी के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक है। 150 वर्ष पूर्व बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने जब ‘वन्दे मातरम्’ की रचना की, तब उन्होंने केवल एक गीत नहीं लिखा, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को स्वर दिया। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा बना, जिसने हर भारतीय के मन में मातृभूमि के प्रति प्रेम और त्याग की भावना जगाई। आज जब हम इस गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर नमन करते हैं, तो यह अवसर स्मरण के साथ संकल्प का भी है। आइए, हम सब मिलकर यह प्रण लें कि अपने कर्म और परिश्रम से आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक बना वंदे मातरम-उप मुख्यमंत्री,

उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत समृद्ध शब्द और अर्थ गौरव के कारण स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख प्रेरक बन गया। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम राष्ट्रगान जन गण मन के बराबर सम्मान प्राप्त है। भारत माता की स्तुति के इस गीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से पूरे देश में गुंजायमान करने का यह महती कदम उठाया गया है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने स्वेदशी संकल्प एवं एकता दिवस की शपथ दिलाई।

मन, शरीर को नई ऊर्जा देता है राष्ट्रगीत – कोटा जिला प्रभारी मंत्री

कोटा जिला प्रभारी मंत्री एवं सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने कहा, स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत को जब भी गाया जाता तो यह गीत एक नया जोश भर देता। आजादी के बाद इस गीत को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। आज भी जब इसके स्वरों को हम दोहराते हैं तो हमारे मन, शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। इसका एक-एक शब्द हमें नई शक्ति देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उत्सव को राष्ट्रीय उत्सव बनाकर इस गीत के महत्व को हम सबको जानने का अवसर दिया है।

सदैव गुंजायमान रहेंगे वंदे मातरम के स्वर- शिक्षा मंत्री

शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि आज का दिन हम सबको प्रेरणा देता है। वंदे मातरम् मात्र एक गीत नहीं अपितु देश भक्ति का भाव जागने वाला गीत है। स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की ताकत को देखते हुए अंग्रेजी हुकूमत ने इस पर पाबंदी लगा दी थी। फिर भी यह गीत स्वतंत्रता का कारण बना जिसके स्वर हमेशा गुंजायमान रहेंगे, देशवासियों को प्रेरणा देते रहेंगे।

कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि युवाओं को भारत भूमि के प्रति समर्पित रहने, उसके प्रति अपने दायित्वों को समझने के लिए इस गीत के प्रति सम्मान भाव जरूरी है।

इस अवसर पर स्कूल, पुलिस एवं आर्मी की बैंड की प्रस्तुतियाँ हुई। संगीत स्कूल की छात्राओं द्वारा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति की गई। समूह गान एवं वंदे मातरम् गायन ने भी माहौल में देशभक्ति का रंग भरा। शहीद परिजनों में वीरांगना बबीता शर्मा, मधुबाला एवं लक्ष्मीदेवी का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।

समारोह में कोटा जिला कलक्टर पीयूष समारिया सहित जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, गणमान्यजन, आर्मी के जवान, एनसीसी कैडेट्स, स्कूली बच्चे एवं आम नागरिकों की भागीदारी रही।

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