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रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान द्वारा आयोजित हुआ विशाल कृषि मेला

कृषि मेले व प्रशिक्षण कायर्क्रम नवीन तकनीक, अनुसंधानों की जानकारी देने में सहायक - डाॅ0 राठौड़

झुंझुनू,(01 मार्च 2024)। रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान द्वारा शुक्रवार को संस्थान के खेलकूद परिसर में विशाल कृषि मेले का आयोजन हुआ जिसमें क्षेत्र के किसान, कृषक महिलाएं, कृषि विषय का अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राएं, पशुपालकों सहित प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। मेले में विभिन्न कम्पनियों एंव सरकारी विभागों द्वारा लगाई गयी कृषि आदानों, उपकरणों, नवीन कृषि यंत्रों, जैविक उत्पादों, जल संरक्षण सहित अन्य उपयोगी जानकारीपरक 35 स्टाॅले लगायी गयी। मेले में कृषि विशेषज्ञों द्वारा कृषि उत्पादन को बढाने, परम्परागत खेती के स्थान पर अधिक आय देने वाली फसलों की बुवाई करने, भोजन में मिलेट्स का उपयोग बढाने जैसी जानकारी दी गयी।
कृषि मेले के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (जयपुर) के पूवर् कुलपति डाॅ0 प्रवीण सिंह राठौड़ ने कहा कि किसानों को अब जमीन के घटते क्षेत्रफल और गिरते भूजल स्तर पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होनें बताया कि निरंतर उवर्रकों के उपयोग से भूिम की गुणवत्ता एंव पोषक तत्वों की उपलब्धता में निरंतर गिरावट आ रही है। इसी प्रकार अधिक सिंचाई वाली फसलों की बुवाई के कारण भूजल स्तर भी गिरता जा रहा है। राजस्थान के 216 ब्लाॅक आॅवर एक्सप्लाॅटेड हो गये है यदि यहीं स्थिति रही तो सिचाँई के लिए दूर पेयजल के लिए हमें पानी की तलाश करनी होगी। उन्होनें सुझाव दिया कि किसानों को संतुलित उवर्रा प्रबंधन पर ध्यान देना होगा।
कायर्क्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रवासी उद्योगपति एंव ट्रस्टी रघुहरि डालमिया ने कहा कि देश को ऐसे किसानों की आवश्यकता है जो देश की प्रगति में सहभागी बने । उन्होने कहा कि किसानों ने जमीन को आबाद कर हम सबको भोजन के लिए अन्न उपलब्ध करवाकर अपनी महत्वपूणर् भूमिका प्रस्तुत की है। उन्होने मेले मे आए किसानों से आग्रह किया कि वे मेेले में प्रदर्शित कि गयी नवीन तकनीकों के उपकरणों, जानकारी व अनुसंधानों के ज्ञान को कृषि उपज बढाने में साझा करे। उन्होने यह भी कहा कि कृषि विद्यालय अथवा महाविद्यालय से आने वाले छात्र-छात्राएं संस्थान द्वारा वषार्जल संरक्षण, वृक्षारोपण व कृषि उत्पादन बढाने के लिए अपनायी जा रही पद्धतियों का किसी भी दिन आकर अवलोकन कर सकते है।
कृषि मेले में उद्यान विभाग झुंझुनू के उपनिदेशक डाॅ0 शीशराम जाखड़ ने परम्परागत खेती के स्थान पर अधिक आय देने वाली नकदी फसलों की बुवाई करने, बागान लगाने, परम्परागत सिंचाई पद्धति के स्थान पर फव्वारा, मिनी फव्वारा आदि पद्धतियों का उपयोग करने का सुझाव दिया। पयार्वरण विकास एंव अध्ययन केंद्र के निदेशक डाॅ0 मनोहर सिंह राठौड़ ने किसानों को एकजुट होने व जागरूक होकर खेती करने का सुझाव दिया। स्वामी केश्वानंद विश्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्वनिदेशक डाॅ0 हनुमान प्रसाद ने रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान द्वारा वषार्जल संरक्षण सहित किसानों की आथिर्क समृद्धि के लिए चलाई जा रही कायर्क्रमों की सराहना की और कहा कि वषार्जल की उपलब्धी को देखते हुए हमें कम पानी के उपयोग वाली फसलों की बुवाई करनी होगी। किसान आयोग के सदस्य ओ0पी0 खेदड़ ने कहा कि मिलेट्स की पोष्कता को देखते हुए हमें इसका उपयोग बढाना होगा। प्रगतिशील कृषक मुकेश मांजू ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
मेले में प्रगतिशील किसानों के रूप में विद्याधर, सवाई सिंह, सुरेश, लालचंद, कुंजबिहारी को, ग्राम विकास समिति के लिए मालुपुरा की ग्राम जलग्रहण समिति को, पयार्वरण मित्र के रूप में राकेश बराला को और जलयोद्धा के रूप में रोहिताश बराला को प्रमाण पत्र व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। प्रारम्भ में संस्थान के परियोजना प्रबंधक भूपेन्द्र पालीवाल ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान की प्रगति पर प्रकाश डाला। कायर्क्रम का संचालन मोनिका स्वामी द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप कुल्हार,जल संसाधन समन्वयक संजय शर्मा, कृषि समन्वयक शुबेन्द्र भट्ट, अजय बलवदा, राकेश महला , सूरजभान रायला, नरेश, बलवान सिंह, अनिल सैनी, मानसिंह, जितेन्द्र एंव सुनिल उपस्थित रहे।

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