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जयपुर, (27 जून 2026)। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि सीए हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। आयकर और जी.एस.टी. से जुड़े नियमों की पालना कराने के साथ ही सीए प्रोफेशनल्स औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण मानकों के अंकेक्षण की दिशा में भी विशेष रूप से सजग रहें। इसी से औद्योगिक विकास के साथ जलवायु परिवर्तन के खतरों से राष्ट्र बचा रहेगा। उन्होंने कहा कि चार्टेड एकाउण्टेट व्यवसाय और आर्थिक क्रियाकलापों के सूक्ष्म अंकेक्षण के अंतर्गत राष्ट्र के राजस्व वृद्धि के लिए अधिकाधिक योगदान दें। उन्होंने कैपिटल बजटिंग, बजट पूर्वानुमान, वित्तपोषण आदि कार्यों के अंतर्गत चार्टेड एकाउंटेंट्स को ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना रखते हुए कार्य करते हुए देश के विकास में अहम भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राज्यपाल बागडे शनिवार को बिड़ला सभागार में ’द इन्टीट्यूट ऑफ चार्टेड एकाउण्टेट्स ऑफ इण्डिया’ द्वारा आयोजित 2047 में भारत की उत्कृष्टता के आलोक में आयोजित ’क्षितिज’ कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ के आदर्श वाक्य ’य एष सुप्तेषु जागर्ति’ की चर्चा करते हुए कहा कि कठोपनिषद का यह मंत्र विद्यार्थियों के जीवन का आलोक बनना चाहिए। इसका अर्थ है, जब सब सोए हुए हों तो भी हमें जागते रहना चाहिए। उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर सभी को अपना योगदान देने के लिए निरंतर सजग रहने पर जोर दिया।
बागडे ने सीएसआर के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्र विकास के कार्यों में सामाजिक सहभागिता के तहत अधिक से अधिक व्यावहारिक कार्य करवाए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि फर्म, व्यावसायिक संगठनों, कंपनियों को सीए प्रोफेशनल्स ऐसे सुझाव दें जिससे सीएसआर के तहत ऐसे अछूते क्षेत्रों में कार्य हो सके जिनकी की समाज को आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षा प्रसार के अंतर्गत, वंचितों को गुणवत्ता की शिक्षा और साधन उपलब्ध कराने, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए योगदान जैसे क्षेत्रों में सरकारी क्षेत्र के साथ निजी क्षेत्र की भी प्रभावी भूमिका सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने सीए विद्यार्थियों से जी.एस.टी.,फोरेन्सिक अंकेक्षण आदि से जुड़े तमाम कार्यों में कानून की मर्यादाओं में रहकर कार्य करने, नियमों का पालन कराने और पारदर्शिता रखते हुए औद्योगिक विकास के साथ देश के विकास में योगदाने देने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारत की ज्ञान परम्परा से जुड़कर आधुनिक विकास की राहों पर आगे बढ़ने की आवश्यकता जताई।
इससे पहले राज्यपाल ने स्मारिका “क्षितिज” का भी विमोचन किया।