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वन विभाग द्वारा सज्जनगढ़ में दो दिवसीय वन मेले का शुभारंभ “सरकार की मंशा हम पुनः वेदों की ओर लौटें” – टीएडी मंत्री श्री खराड़ी

जयपुर, (17 जनवरी 2026)। वन उत्पादों को प्रोत्साहन देने एवं ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा उदयपुर के सज्जनगढ़ में शनिवार से आयोजित दो दिवसीय वन मेले का शुभारंभ जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग मंत्री

बाबूलाल खराड़ी ने फीता काटकर किया। मेले में वन आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें जिले एवं आसपास के क्षेत्रों से आए उत्पादक भाग ले रहे है।

मंत्री खराड़ी ने मेले में लगाई गई प्रत्येक स्टॉल का अवलोकन किया और वन उत्पादों की गुणवत्ता, विपणन एवं संभावनाओं की जानकारी ली। इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री खराड़ी ने कहा कि एक समय था जब देश में लोग दीर्घायु जीवन के लिए वन औषधियों का उपयोग करते थे, लेकिन आज हम केमिकल युक्त चिकित्सा पद्धतियों पर अत्यधिक निर्भर हो गए हैं, जिससे मानव जीवन की आयु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सरकार की मंशा है कि समाज को पुनः वेदों और प्राकृतिक जीवन पद्धति की ओर लौटाया जाए।

उन्होंने कहा कि वन उपज से दोहरे लाभ प्राप्त होते हैं, एक ओर लोगों को आजीविका का साधन मिलता है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य लाभ भी होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सृजन के लिए ट्राईफेड जैसी संस्थाएं उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। पर्यावरणीय संतुलन की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित दोहन ही भविष्य को सुरक्षित कर सकता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद श्री चुन्नीलाल गरासिया ने कहा कि वन क्षेत्रों में उपलब्ध उपज से अनेक प्रकार के मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिनमें महुआ और शहद प्रमुख हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के अधिकाधिक लोग लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि जहां वनवासी हैं, वहां वन भी सुरक्षित हैं। अरावली के संरक्षण में वन विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और वर्तमान में अरावली को लेकर चल रहे विषय चिंताजनक हैं, जिन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

लोकसभा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि हमारे ग्रामीण समुदाय वनों के महत्व को भली-भांति समझते हैं। अन्य देशों की अच्छी प्रथाओं (बेस्ट प्रैक्टिसेस) को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बांस भी ग्रामीण आजीविका का एक सशक्त माध्यम बन सकता है, जिस पर और अधिक कार्य किया जाना चाहिए।

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