Rajasthan Update
Rajasthan Update - पढ़ें भारत और दुनिया के ताजा हिंदी समाचार, बॉलीवुड, मनोरंजन और खेल जगत के रोचक समाचार. ब्रेकिंग न्यूज़, वीडियो, ऑडियो और फ़ीचर ताज़ा ख़बरें. Read latest News in Hindi.

बीमा कंपनी की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 9.48 लाख रुपये क्लैम भुगतान का आदेश

आयोग की सख्त टिप्पणी: बीमा कंपनी केवल अपने मुनाफे की परवाह न करे, बीमा धारक से निष्पक्ष व्यवहार करे

झुंझुनूं, (11 मार्च 2026)। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं ने उपभोक्ता हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए बीमा कंपनी को वाहन दुर्घटना के दावे की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी उपभोक्ता से प्रीमियम लेने के बाद दावे के भुगतान से बच नहीं सकती।

आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील तथा सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी की पीठ ने कुलदीप भास्कर निवासी झुंझुनूं द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। परिवादी ने बताया कि उसकी कार का बीमा 9 लाख 50 हजार रुपये बीमित मूल्य पर कराया गया था। 13 दिसंबर 2021 को वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर आग लगने से पूरी तरह जल गया, जिसके बाद बीमा कंपनी के पास क्लेम प्रस्तुत किया गया, लेकिन कंपनी ने लंबे समय तक टालमटोल करते हुए दावा निपटान नहीं किया।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष प्रस्तुत सर्वेयर रिपोर्ट में वाहन को टोटल लॉस मानते हुए लगभग 9 लाख 48 हजार रुपये की क्षति आंकी गई। इसके बावजूद बीमा कंपनी द्वारा भुगतान नहीं किया गया, जिसे आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।

आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि जब बीमा कंपनी ने स्वयं वाहन का बीमित मूल्य निर्धारित कर उसी आधार पर प्रीमियम प्राप्त किया है, तो बाद में भुगतान से बचना उचित नहीं है। आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि बीमा कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवहार करना चाहिए।

आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह 9 लाख 48 हजार रुपये की क्लेम राशि, परिवाद दायर करने की तिथि 6 जनवरी 2023 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 45 दिनों के भीतर अदा करे। साथ ही परिवादी को मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख 35 हजार रुपये तथा 5 हजार रुपये परिवाद व्यय के रूप में भी देने के निर्देश दिए गए है।

आयोग ने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर पूरी राशि पर 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का‌ हवाला देते हुए कहा है कि एक बीमा कम्पनी से यह उम्मीद की जाती है कि वह बीमा धारक के साथ वास्तविक और निष्पक्ष व्यवहार करेगा, न कि केवल अपने मुनाफे की परवाह करेगा।

सद्भावना का दायित्व बीमा धारक उपभोक्ता से ज्यादा बीमा कर्ता बीमा कंपनी का बनता है:

इस मामले में कंपनी ने बीमा प्रीमियम भरवाते वक्त गाड़ी की कीमत 9.50 लाख रुपए आंकी, जबकि दुर्घटना में गाड़ी जलने के बाद में बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने गाड़ी की कीमत 6.50 लाख रुपए ही मानी। उपभोक्ता आयोग ने इस अनुचित व्यापार व्यवहार माना है।

आयोग ने अपने फैसले में लिखा है कि न्याय हित में यह टिप्पणी करना उचित एवं आवश्यक है कि प्रायः बीमा कम्पनियां बीमा पॉलिसी जारी करते समय नियमानुसार बीमा प्रीमियम राशि उपभोक्ता से प्राप्त करती हैं और जब क्षतिपूर्ति करने का समय आता है, उस वक्त बीमा पॉलिसी की शर्तों, नियमों की आड़ में वाहन दुर्घटना दावा क्षतिपूर्ति राशि को चुकाने में सामान्यतः उन आधारों को लेकर आती हैं, जिन आधारों को सद्भावी रुप से सम्पूर्ण करने का दायित्व बीमाकर्ता बीमा कम्पनियों का बनता है। क्योंकि बीमा पॉलिसी जारी करने का स्वतन्त्र रूप से अधिकार बीमा कम्पनियों का है। कोई भी उपभोक्ता अपनी स्वेच्छा से मनमर्जीपूर्वक बीमा पॉलिसी जारी नहीं करवा सकता है। इसलिए सद्भावना का दायित्व उपभोक्ता से ज्यादा बीमाकर्ता बीमा कम्पनियों पर लागू होता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.