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आई.आई.टी., नई दिल्ली के छात्रों ने समझा डालमिया सेवा संस्थान के कृषि, पयार्वरण सरंक्षण एंव जल संरक्षण संबधी कार्यों को
झुंझुनू, (07 जनवरी, 2024)। रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान, चिड़ावा आई.आई.टी., नई दिल्ली के छात्रों ने समझा डालमिया सेवा संस्थान के कृषि, पयार्वरण सरंक्षण एंव जल संरक्षण संबधी कार्यों को भारतीय प्रौधोगिकी संस्थान, नई दिल्ली से आए छात्रों के दल ने रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान द्वारा पानी एवं पर्यावरण के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न कार्यों का अवलोकन किया एवं समझा। इस अवसर पर परियोजना प्रबंधक भूपेन्द्र पालीवाल, संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप कुल्हार, जल संसाधन एंव ग्रामीण विकास समन्वयक संजय शर्मा, कृषि एंव वानिकी समन्वयक शुबेन्द्र भट्ट एंव आई0 आई0 टी नई दिल्ली के 34 विद्यार्थी और एक प्रोफेसर मौजूद थे।
सँस्थान के संस्थापक श्री रघु हरि डालमिया के मार्गदर्शन और प्रेरणा में आईआईटी का यह दल गांव में हो रहे विकास कार्यों और वर्षाजल संरक्षण के कार्य को देखने और समझने गाँवों में आएँ।
इस अवसर पर संस्थान के कृषि समन्वयक एवं जल समन्वयक द्वारा भारतीय प्रौधोगिकी संस्थान, नई दिल्ली से आए छात्रों को परियोजना क्षेत्र के गांव मालुपुरा, खुडो़त, जखोड़ा, ढाणी इस्माईलपुर एंव गोविन्दपुरा गांवों में संस्था द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों एवं समन्वित कृषि प्रणाली के तहत रबी फसलों एवं फलवृक्षों के बगीचों का अवलोकन करवाया। संस्थान के परियोजना प्रबंधक भूपेन्द्र पालीवाल ने सभी छात्रों को संस्थान परिसर में बने जल संसाधन केन्द्र का अवलोकन करवाया और सभी गतिविधियों की वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी।
अवलोकन के दौरान गांव मालुपुरा में नाबार्ड का डालमिया सेवा संस्थान के तत्वाधान में चल रहे नाॅन वाटरशैड प्रोजेक्ट के तहत हुए कार्यों पौधारोपण, पुनभर्रण कूप, बीपीएल परिवारों के यहाँ बने वषार्जल संग्रहण कुण्ड, शौचालयों, कुण्ड बागवानी के साथ-साथ समन्वित कृषि के तहत वहाँ लगे बगीचों, जैविक उत्पादों, जैविक खेती, अजोला युनिट और पशुपालन का अवलोकन किया। अवलोकन के दौरान संस्थान के परियोजना प्रबंधक ने चिडा़वा क्षेत्र के घटते हुये जल स्तर की चिन्ता जताते हुये कहा कि हमें भविष्य में चाहिए कि किसान कम पानी चाहने वाली फसलों के बीजों का इस्तेमाल करे एवं अत्याधिक पानी का दोहन ना करके जितना पानी फसल को सिचांई के लिए चाहिए उतना ही खर्च करने की बात कही साथ ही कहा कि अधिक पानी चाहने वाली फसलों को हमें छोड़ना होगा जिससे कि भूजल का स्तर कम से कम गिर पाए एवं पानी की गुणवत्ता बनी रहे साथ ही उन्होनों किसानों की आय दोगुनी करने के नुस्खे बताए।
संस्थान के जल समन्वयक संजय शर्मा ने विभिन्न गांवों के भूजल स्तर के बारे में जानकारी दी एवं संस्थान द्वारा किये जा रहे वर्षा जल संग्रहण कूप, सोखती कुई, टांका एवं विभिन्न कार्यों के बारे में आई.आई.टी., नई दिल्ली के छात्रों को विस्तार से जानकारी दी साथ ही साथ जखोड़ा में बना भित्ती चित्र के माध्यम से जल संरक्षण के कार्यों को विस्तार से बताया एवं उन्होनें कार्यों में समाज की सहभागिता के बारे में बताया।
कृषि समन्वयक भट्ट ने आई.आई.टी. छात्रों को समन्वित कृषि प्रणाली के तहत कम पानी में तैयार होने वाली विभिन्न फसलों की जानकारी दी एवं रबी फसलों में बीजोपचार के महत्व के बारे में बताया एवं साथ ही संस्थान द्वारा लगाये गये फलवृक्षों के बगीचों के बारे में जानकारी दी व छात्रों को बताया कि घटते भूजल स्तर को रोकने के लिए फसल उत्पादन की जगह बगीचा लगाना ही एकमात्र समाधान है। इस अवसर पर संस्थान के क्षेत्रिय पयर्वेक्षक सूरजभान, बलवान सिंह, राकेश महला, मानसिँह, अजय बलवदा, अनिल सैनी एवं समस्त गांवों के ग्रामवासी मौजूद थे।