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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल राजस्थान ज्ञान, कला और संस्कृति की पुण्यभूमि

हमारी सरकार प्रदेश के साहित्य तथा सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए प्रतिबद्ध - मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर, (15 जनवरी 2026)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति एवं साहित्य अद्भुत है। यहां वृक्षों, पहाड़ों और नदियों को पूजा जाता है। हमें अपनी इस सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आगे बढ़ना है ताकि आगामी पीढ़ी इससे प्रेरणा ले तथा गर्व की अनुभूति करंे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति और साहित्य के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी से साहित्य को जीवन का हिस्सा बनाने की भी अपील की।

शर्मा गुरुवार को जयपुर में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती सदियों से ज्ञान, कला और संस्कृति की संवाहक रही है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल विचारों का उत्सव एवं महासागर है। यह आयोजन साहित्य के साथ राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक उजागर करने में मददगार साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान साहित्य, संगीत और कला की पुण्य भूमि है। यहां आमेर के किले से लेकर हवा महल तक हर विरासत में संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। पृथ्वीराज रासो राजस्थान की वीरगाथात्मक संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मीरा की भक्ति, ढोला-मारू की कहानियां आज भी करोड़ों हृदयों को स्पंदित करती है। विजयदान देथा, कन्हैयालाल सेठिया, कोमल कोठारी जैसे साहित्यकार राजस्थान की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना की मशाल हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरा भक्ति और शक्ति की धरा है। महाराणा प्रताप, पन्नाधाय, अमृता देवी जैसे शूरवीरों ने अपने त्याग, बलिदान और समर्पण से प्रदेश की मिट्टी को गौरवान्वित किया है।

पुस्तक पीढ़ियों तक फैलाती है ज्ञान का प्रकाश- 

शर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि हमें गुलदस्ते की जगह पुस्तक भेंट करनी चाहिए क्योंकि पुस्तक पीढ़ियों तक ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। शर्मा ने कहा कि किताबें जीवन को समझने का नया दृष्टिकोण देती हैं। साथ ही, साहित्य मनुष्य को संवेदना और करुणा से जोड़कर चिंतनशील और विनम्र बनाता है। हमारे पूर्वजों ने ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और जनकल्याण के ग्रंथ श्लोक में लिखे और इस ज्ञान को साहित्य के द्वारा लोगों तक पहुंचाकर लोकप्रिय बनाया। उन्होंने कहा कि मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध वीरों को प्रेरित करने, आजादी के आंदोलन में सेनानियों में जोश भरने, आपातकाल के दिनों में तानाशाही शासन को चुनौती देने से लेकर युद्ध में सेना का हौसला बढ़ाने तक हर समय साहित्य ने राष्ट्रनिर्माण का कार्य किया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीगण दिया कुमारी व डॉ. प्रेम चंद बैरवा, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, जेएलएफ डायरेक्टर नमिता गोखले, विलियम डेलरिंपल, टीमवर्क आटर््स के एमडी संजय रॉय, विभिन्न ख्यातनाम लेखक व साहित्यकार एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

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