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जयपुर, (18 फरवरी 2026)। उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजऋर्षि भर्तृहरी मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर तथा राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर द्वारा स्वयंपाठी विद्यार्थियों से लिया जा रहा विमर्श शुल्क विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इसमें प्रत्यक्ष संशोधन किया जाना संभव नहीं है।
उच्च शिक्षा मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक मनीष यादव द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन विश्विद्यालयों द्वारा अपने-अपने अधिनियमों एवं प्रावधानों के अन्तर्गत सक्षम निकायों से अनुमोदन उपरान्त ही स्वयंपाठी विद्यार्थियों से प्रति छात्र 1 हजार रुपये विमर्श शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय इस प्रकार का शुल्क निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं।
उन्होंने बताया कि विमर्श शुल्क का उपयोग स्वयंपाठी छात्रों को हेल्पडेस्क के माध्यम से शैक्षणिक एवं परीक्षा संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त इस शुल्क में भवन एवं अन्य प्रशासनिक व्यय भी शामिल रहते हैं।
इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री ने मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजऋर्षि भर्तृहरी मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर तथा राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर द्वारा स्वयंपाठी विद्यार्थियों से लिए जा रहे ‘विमर्श शुल्क’ के संबंध में तीनों विश्वविद्यालयों द्वारा जारी आदेशों की प्रति सदन के पटल पर रखी। साथ ही इस शुल्क के माध्यम से दी जाने वाली सुविधाओं का विवरण एवं विमर्श शुल्क लागू होने की तिथि से दिसम्बर, 2025 तक विश्वविद्यालयवार विमर्श शुल्क के रूप में प्राप्त राशि का वर्षवार विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा।
उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालयों से प्राप्त सूचना के अनुसार विमर्श शुल्क परीक्षा शुल्क का ही भाग होने के कारण परीक्षा मद में प्राप्त समस्त प्रकार की शुल्क राशि का उपयोग विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं के स्तर पर ही परीक्षा संबंधी विभिन्न कार्यों हेतु किया जाता है। ऐसी स्थिति में विमर्श संबंधी कार्य में होने वाले व्यय हेतु पृथक से मद प्रावधित नही है एवं विमर्श के पेटे व्यय राशि का रिकॉर्ड पृथक से संधारित नही किया जाता है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय में विमर्श शुल्क से प्राप्त राशि का छात्रहित में परीक्षा कार्य में उपयोग किया जाता है। विमर्श शुल्क के अनुमोदन सम्बन्धी आदेशों का विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों की समुचित ऑडिट महालेखाकार (Accountant General), स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग (LFAD) एवं आंतरिक द्वारा समय-समय पर की जाती है।