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महान मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक चेतना से लबरेज व्यक्तित्व थे गुरुजी

चूरू, । राज्य के विधि एवं न्याय क्षेत्र में गुरुजी के नाम से मशहूर लोहिया कॉलेज के प्रवक्ता रहे प्रो महावीर सिंह यादव को उनके शिष्यों, अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों, विधि अधिकारियों, विधि विद्यार्थियों और नागरिकों ने सोमवार को सिविल लाइंस में उनके जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में याद किया।

विधि सत्संग के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में जुटे विधि विशेषज्ञों ने विधि और दर्शन के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया और कहा कि पूर्व सभापति गोविंद महनसरिया, पूर्व सभापति विजय शर्मा, साहित्यकार भंवर सिंह सामौर, एसीजेएम पीके वर्मा, एसीएजेएम अजय पूनिया, एसीजेएम  अमरजीत कुलहरी, रेलवे मजिस्ट्रेट नारायण प्रसाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर पारीक, सहायक निदेशक (जनसंपर्क) कुमार अजय  ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि देकर उन्हें याद किया और उनके योगदान का स्मरण किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साहित्य अकादेमी अवार्डी राजस्थानी के ख्यातनाम लेखक भंवर सिंह सामौर ने कहा कि प्रो. यादव का चूरू के विधिक क्षेत्र में योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह यादव का चमत्कारिक व्यक्तित्व ही था कि आज इतने बरसों बाद भी उनकी स्मृति अधिक मजबूत होती जा रही है।

सहायक निदेशक (जनसम्पर्क) कुमार अजय ने कहा कि गुरुजी भरपूर आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक चेतना से भरपूर ऎसे अकादमिक व्यक्ति थे जिन्होंने अपने सूत्रों से लोगों का जीवन बदल दिया। उन्होंने कहा कि यादवजी के व्यक्तित्व में ही कुछ ऎसी बात थी कि जो भी उनके संपर्क में आता था, उनका हो जाता था।

रेल्वे मजिस्ट्रेट सीजेएम नारायण प्रसाद ने कहा कि गुरुजी का जीवन इतनी बहुआयामी घटनाओं और चमत्कारों से भरा पड़ा है कि इसे शब्दों में व्यक्ति करना काफी मुश्किल काम है। पूर्व सभापति गोविंद महनसरिया ने कहा कि गुरुजी के आशीर्वाद से कितने लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं, यह इतना महत्त्वपूर्ण नहीं है जितना यह जानना कि गुरुजी ने कितने ही लोग के विचार और जिंदगी में बड़ा बदलाव किया। पूर्व सभापति विजय शर्मा ने कहा कि गुरुजी का एक सूत्र आदमी की जिंदगी बदल देता था।

न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर पारीक ने गुरुजी के जीवन के अनेक प्रसंग सुनाए और कहा कि उन्हें गुरुजी का सर्वाधिक आशीर्वाद प्राप्त हुआ, इसके लिए वे खुद को अत्यंत सौभाग्यशाली समझते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी जीवन में कोई मुश्किल घड़ी आकर खड़ी हो जाती हैं, तो उन्हें गुरुजी मुस्कराते हुए दिखाई देते हैं और चुटकियों में समस्याओं का समाधान निकल जाता है।

पूर्व बार कौंसिल सदस्य रोशन सिंह राठौड़ ने कहा कि गुरुजी का जीवन ही अपने आप में एक संदेश था। उन्होंने एक बेहद, सरल, सहज, आडंबर मुक्त लेकिन उच्च आदर्शों से युक्त था। हमें उनके आदर्शों पर चलने की कोशिश करनी चाहिए।

डीएलआर धर्मपाल शर्मा ने कहा कि गुरुजी के संपर्क में आने के बाद उनके जीवन में आमूलचूल बदलाव आया और ऎसे सैकड़ों-हजारों लोग हैं, जिनके जीवन को गुरुजी के दर्शन ने बदल दिया।

इस दौरान शिष्यों ने गीत, कविता, संस्मरण, सम्बोधन के जरिये गुरुजी के व्यक्तित्व, व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। विधि सत्संग संस्था के महेंद्र सैनी ने आभार जताया और विधि सत्संग की गतिविधियों की जानकारी दी।

इस दौरान एसीजेएम पीके वर्मा, एसीएजेएम अजय पूनिया, एसीजेएम  अमरजीत कुलहरि, रेलवे मजिस्ट्रेट नारायण प्रसाद, मोबाइल मजिस्ट्रेट अविनाश चांगल, न्यायिक मजिस्ट्रेट हिमांशु कुमावत, न्यायिक मजिस्ट्रेट  उषा प्रजापत, न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा कुमावत, न्यायिक मजिस्ट्रेट जया सैनी,  न्यायिक मजिस्ट्रेट शिखा शर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट सतीश, न्यायिक मजिस्ट्रेट  सुरेश कुमार, न्यायिक मजिस्ट्रेट  हुक्मीचंद गहनोलिया, डीएलआर सुखदेव सिंह, डीएलआर शुभकरण, लेक्चरर सुरेश नायक, विधि व्याख्याता श्रीराम सैनी एवं अनिल सैनी, पूर्व बार कौंसिल सदस्य

रोशन सिंह, चूरू बार अध्यक्ष नरेंद्र सैनी, डीएलआर धर्मपाल शर्मा, एपीओ दिव्यांश पांडे, एपीओ  घनश्याम सोनी, कोषाधिकारी धीरज जोशी, वरिष्ठ विधि अधिकारी महेंद्र सैनी, संतोष चांगल, मुकुल दीक्षित, एपीआरओ मनीष कुमार, यूनुस खान, पुष्पकान्त शर्मा, देवेंद्र शर्मा, बलबीर सैनी, हुसैन खान, गीता सामौर, आरती सामौर, मानसिंह सामौर आदि ने विचार व्यक्त किये।

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