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मण्डावा, (24 मई 2026)| अंचल के ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद अब 31 जुलाई 2026 से पहले चुनाव कराने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक और गतिविधियां बढ़ गई है। राजनीतिक अदालत ने साफ कहा है कि राज्य सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर चुनाव नहीं टाल सकती। इसके बाद पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों में संभावित प्रत्याशी सक्रिय हो गए है।
हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को शहरी निकायों के वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 20 जून तक पूरा करने के निर्देश दिए है। तय समय सीमा में अब एक महीने से भी कम समय बचा है। पहले अदालत ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन राजस्थान सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने का हवाला देते हुए असमर्थता जताई थी। अब कोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रशासनिक मशीनरी तेजी से सक्रिय हो गई है।
जगा चुनावी माहौल
कोर्ट के आदेश के बाद ग्रामीण राजनीति में फिर हलचल बढ़ गई है। पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य बनने की तैयारी कर रहे लोग गांव-ढाणियों में बैठकों और जनसंपर्क में जुट गए हैं। लंबे समय से चुनाव टलने के कारण स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां धीम पड़ गई थीं, लेकिन अब सामाजिक कार्यक्रमों और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए माहौल फिर गर्माने लगा है।
हजारों पदों पर होगा चुनाव
क्षेत्र में जिला परिषद वार्ड,इसके अलावा पचायत समितियों में ब्लॉक मेम्बर आते तथा इनके अंतर्गत ग्राम पंचायतें आती हैं। इन पंचायतों में जारों वार्ड पंचों के पदों पर भी चुनाव होना है। इतने बड़े स्तर पर चुनाव होने से पूरे अचंल में व्यापक राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलेंगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार स्थानीय मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे।
स्थानीय मुद्दों पर रहेगा फोकस
भावी प्रत्याशियों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। गांवों में सड़क, पानी, बिजली, रोजगार और विकास कार्य जैसे मुद्दे चर्चा में आने लगे है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार चुनाव में युवाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है, जिससे मुकाबला और रोचक होने की संभावना है
निकाय चुनावों को लेकर भी बढ़ी उम्मीद
ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी निकायों में भी चुनाव को लेकर उत्साह बढ़ा है। मलसीसर नगरपालिका का गठन हुए करीब दो साल हो चुके हैं. लेकिन अब तक यहां चुनाव नहीं हुए हैं। इसी तरह डुण्डलोद और जाखल, सिघांना में भी निकाय चुनाव लंबित हैं। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद इन क्षेत्रों में भी चुनाव की उम्मीद मजबूत हुई है।