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राजनीति की भेंट चढ़ा उत्सव, तथाकथित नेताओं ने मान लिया आयोजन को निजी
तीन दिवसीय आयोजन में जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध जनों, की हुई अनदेखी
लक्षमनगढ, (11 मार्च 2024)। वरिष्ठ पार्षद पवन बूटोलिया ने यहां चल रहे तीन दिवसीय शेखावाटी उत्सव पर प्रश्न चिन्ह लगाया है। सोशल मीडिया के जरिए बूटोलिया ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मारवाड़ी में एक कहावत है मामा को ब्याव………….. ठीक इसी तर्ज पर लक्षमनगढ के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 9 से 11 मार्च तक आयोजित चौथे शेखावाटी उत्सव में इस घटिया स्तर की मानसिकता के साथ ओछी राजनीति नजर आई। इस राजनीतिक के पीछे किसकी भूमिका रही और पर्यटन विभाग,जिला प्रशासन क्यों मूक दर्शक बना रहा।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जनचर्चा व लक्षमनगढ के नागरिकों का मानना है कि आयोजन को सरकारी होते हुए भी निजी के रुप में काम में लिया गया तथा स्वयंभू नेताओं ने तो राजनैतिक मर्यादा तक तार तार कर दिया। मौजूद पालिकाध्यक्ष के पहले पूर्व पालिकाध्यक्ष के अध्यक्ष में आयोजन के दौरान प्रचारित करना पूर्व पालिकाध्यक्षो को निमंत्रण तक नहीं देकर आयोजन को पूरी ओछी राजनीति का अखाड़ा बना दिया। वर्तमान पालिका उपाध्यक्ष को भी नजर अंदाज कीया गया। आयोजन में तथाकथित नेताओं ने अपनी जमकर भडास निकाली तथा वीआईपी पास उनके परिजनों को देकर अपना रूतबा परिजनों को बताया जबकि अधिकारी व जनप्रतिनिधियो तक के प्रोटोकॉल को नजर अंदाज किया।
बूटोलिया ने कहा कि शेखावाटी उत्सव को शुरू करवाने में अहम व महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पूर्व पालिकाध्यक्ष चांदनी शर्मा तक को न्यौता नहीं दिया गया। शर्मा ने स्टेडियम को भव्य बनाने के साथ साथ जीर्णोद्धार करवाया तथा इस तरह का स्टेडियम को लुक दिया कि आज स्टेडियम शहर का एक प्रमुख स्थल बना हुआ है तथा पर्यटन व मार्निंग वॉक की दृष्टि से बड़ा उपयोगी साबित हो रहा है। मजेदार बात यहां यह भी है कि आधा दर्जन सरकारी शिक्षक आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रहे थे। जिनको कोंग्रेसी बता कर इस बार नजर अंदाज कर आयोजन से पूरी तरह दूर रखा। कुछ नेता तो आयोजन के निजी मिल्कियत मान बैठे वो भूल गए यह आयोजन राजनैतिक नहीं सरकारी है।