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डालमिया संस्थान द्वारा चिड़ावा में आयोजित हुआ किसान मेला, 45 स्टालें लगी
पानी व जमीन बचाने के लिए करना होगा वृक्षारोपण - मुख्य वक्ता सुण्डाराम
चिड़ावा (झुन्झुनू) (10 मार्च 2025)। रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान द्वारा चिड़ावा कस्बे के खेलकूद परिसर में जिला स्तरीय किसान मेले का आयोजन हुआ जिसमें जिले के करीब 2 हजार कृषक व कृषक महिलाओं ने भाग लिया। मेले में वर्षाजल संरक्षण, भूजल का समुचित प्रबंधन, कृषि क्षेत्र में हुए नवाचार, उन्नत कृषि यंत्र, अधिक उपज देने वाले बीज, खाद, जैविक खेती प्रतियोगिता, ग्रामीण खेल, उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान व फल एंव फसल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन हुआ।
मेले में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पद्मश्री अवार्डी सुण्डाराम ने कहा कि भूजल का अत्याधिक दोहन, वर्षाजल का संरक्षण नही करने, प्राकृतिक जल संरक्षण वाली पद्धतियों को भुला देने जैसे कारणों से भूजल स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में हमें ध्यान देना होगा। उन्होने बताया कि कम जल की उपलब्धता के बाद भी नवीन तकनीक से फलदार पौधे लगाये जा सकते है। उन्होनें बताया जल संरक्षण के प्रति अपनी सोच में बदलाव लाना होगा जिससे जल प्रदुषण होने से संरक्षित रह सके। उन्होनें बताया कि वृक्षारोपण करने वाले किसान या संस्थाए भारत सरकार की कार्बन क्रेडिट योजना के तहत प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकते है।
किसान मेले में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए जिला कलेक्टर डाॅ0 अरूण गर्ग ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं पर अकंुंश लगाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अति दोहन पर अंकुश लगाना होगा। उन्होनें कहा कि आज व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते मानव जल, जमीन, वायु जैसे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर प्राकृतिक आपदाओं को बुला रहा है। इसके लिए हमें मिलकर जन जागृति अभियान चलाना होगा। उन्होनें कहा कि जी0डी0पी0 में कृषि का योगदान कभी कम नही होगा बल्कि इसे बढाने के लिए नवीन अनुसंधानों व आधुनिक कृषि क्रियाओं की जानकारी किसानों को मेले या गोष्ठियों के माध्यम से देनी होगी। उन्होने डालमिया संस्थान द्वारा वर्षाजल संरक्षण व कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में किये जा रहे कार्यो की प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वास दिलाया कि जिला प्रशासन इन कार्यों में सहयोग करेगा।
विशिष्ट अतिथि एंव कार्यक्रम के प्रेरणास्त्रोत रघुहरि डालमिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि खेती के निरन्तर लाभकारी बनने के कारण महिलाएं व युवा इस क्षेत्र में आगे आने लगे है। उन्होनें सुझाव दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा समाज के उत्थान के कार्यो पर व्यय करना चाहिए। उन्होनें कृषि विश्वविद्यालय व महाविद्यालय के छाात्र-छात्राओं से कहा कि वे संस्थान से जुड़ कर किसानों की समृद्धि में भागीदार बने। इससे पहले युवा कृषक मानसिंह, सज्जनपाल, श्रीमती संतोष देवी ने अपने विचार व्यक्त कर कृषि को लाभकारी बनाने के गुर बताये। अंत में स्वामी केश्वानंद कृषि विश्वविद्यालय बीकाने के पूर्व निदेशक डाॅ0 हनुमान प्रसाद ने सबका आभार व्यक्तकिया। कार्यक्रम में संस्थान के सलाहकार निरंजन सिंह व सी0ए0 मनीष अग्रवाल सहित किसान व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। प्रारंभ में संस्थान के परियोजना प्रबंधक भूपेन्द्र पालीवाल ने अतिथियों का स्वागत किया । कार्यक्रम का संचालन संस्थान की आई0टी0 आफिसर मोनिका स्वामी द्वारा किया गया।
*ग्रामीण खेल हुए आयोजित:- महिलाओं में दिखा भारी उत्साह*
मेले में महिलाओं की रस्साकशी प्रतियोगिता में नरहड़ की टीम प्रथम, खुडिया की द्वितीय, हमीरवास की तृतीय, महिलाओं की म्यूजिकल चैयर में मुन्नी देवी प्रथम, रोशनी देवी द्वितीय, कविता तृतीय, पुरूषों की सैक रेस में रूपल प्रथम, विजय द्वितीय, संदीप तृतीय तथा मटका दौड़ में ताराचंद प्रथम, सुरेश द्वितीय व बलवंत तृतीय स्थान पर रहे।
किसान मेले में प्रगतिशील किसान के रूप में महरमपुर के धुड़ाराम, जखोड़ा के राजेश कुमार, मालुपुरा के जयकरण, जलयोद्धा के रूप में लाम्बा गांव के सीताराम जांगिड़ पर्यावरण मित्र के रूप में इक्तावरपुरा के भरत सिंह व ग्राम विकास समिति जोडिया को प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। स्टाॅल प्रतियोगिता में श्रीधर विश्वविद्यालय के कृषि विभाग, स्थानीय कृषि महाविद्यालय प्रथम, एग्रो एग्रीकल्चर संभल (उ0प्र0) द्वितीय तथा पूनिया एग्रोटेक तृतीय स्थान पर रहे। मेले में आयोजित फसल व फल प्रतियोगिता के 21 सफल प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।