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राजस्थान स्वास्थ्य बजट 2026–27: कुछ सकारात्मक कदम, किन्तु ‘राइट टू हेल्थ एक्ट’ पर चुप्पी निराशाजनक;सार्वजनिक स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता भी बरकरार!
जयपुर (12 फरवरी 2026)। जन स्वास्थ्य अभियान,राजस्थान राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुतवित्तीय वर्ष 2026–27के बजट में स्वास्थ्य सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण घोषणाओं का स्वागत करता है। विशेष रूप से यह स्वागतयोग्य है किदस्तावेज़ोंकी कमी के कारण अब तक निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित जनसँख्या को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना और निरोगी राजस्थान योजना के अंतर्गत निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की घोषणाकी गई है।
जन स्वास्थ्य अभियानराजस्थान की लंबे समय से यह स्पष्ट मांग रही है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवा तंत्र से निःशुल्क सेवाएं प्राप्त करने हेतु जन आधार कार्ड इत्यादि जैसी दस्तावेज़ीय अनिवार्यता समाप्त की जानी चहिये, क्योंकि इसके चलते गरीब और हाशिये पर रह रहे समुदाय उपचार से बाहर रह जाते हैं। इस घोषणा का यदि ईमानदार और संवेदनशील क्रियान्वयन हुआ, तो यह वंचित वर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत होगी।
इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ECG/Tele ECG और Tele-Thrombolysis की सुविधा की घोषणा से हृदयाघात जैसी आपात स्थितियों में समय पर पहचान और उपचार संभव हो सकेगा।
सड़क दुर्घटनाओं और अन्य इमरजेंसी स्थितियों के लिए RAJ-SURAKSHA प्रणाली तथा 24×7 कमांड सेंटर की घोषणा आपातकालीन सेवाओं के बेहतर समन्वय में सहायक होगी। बजट भाषण में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए RAJ-MAMTAकार्यक्रम की घोषणा राज्य की तेज़ी से बढती जन स्वास्थ्य चुनौती को संबोधित करने की दिशा में अहम् कदम है।बजट मेंपेयजल आपूर्ति और स्वच्छता पर दिया गया महत्वपूर्ण ज़ोरभी स्वागतयोग्य है।
हालांकि, इन घोषणाओं के बावजूद यह बजट कई स्तरों पर निराश करता है।सबसे निराशाजनक यह है किराज्य सरकार द्वारा 2023 में पारित किए गए ‘राइट टू हेल्थ एक्ट’ को लेकर बजट भाषण में कोई उल्लेख या प्रतिबद्धता नहीं दिखाई दी। स्वास्थ्य को कानूनी अधिकार के रूप में स्थापित करने के बाद उसके क्रियान्वयनपर सरकार की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है। ज्ञात हो कि “राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम 2022” को पारित हुए 3 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक इसके नियम तैयार नहीं किए गए हैं जिस वजह से यह अधिनियम लागू नहीं हो पाया है.साथ ही,स्वास्थ्य बजट में कोई उल्लेखनीय वृद्धि न होना गंभीर चिंता का विषय है। पिछले वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य बजट बजट अनुमान (BE)के स्तर पररु. 31,888 करोड़था, जिसे बाद मेंसंशोधित अनुमान (RE)के स्तर पर घटाकररु. 30,167 करोड़कर दिया गया।
इस पृष्ठभूमि में, 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए घोषितरु 32,525 करोड़का स्वास्थ्य बजट केवल एक मामूली वृद्धि दर्शाता है, जो महंगाई की दर और आबादी की बढ़ती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुएअत्यंत अपर्याप्तहै। नई योजनाओं और तकनीकी पहलों की घोषणा के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए पर्याप्त संसाधनों का अभाव उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहले से ही मानव संसाधनों की कमी,बुनियादी सुविधाओं की कमजोर स्थिति और बढ़ते बोझ से जूझ रही हैं, जिस पर बजट में अपेक्षित जोर दिखाई नहीं देता।
जन स्वास्थ्य अभियान का मानना है किस्वास्थ्य को योजनाओं तक सीमित करने के बजाय उसे एक मजबूत, पर्याप्त रूप से वित्तपोषित सार्वजनिक प्रणाली के माध्यम से अधिकार के रूप में लागू करना आवश्यक है। हम राज्य सरकार से अपेक्षा करते हैं कि बजट में की गई सकारात्मक घोषणाओं का जवाबदेह क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और आने वाले समय में स्वास्थ्य बजट में वास्तविक वृद्धि के साथराइट टू हेल्थ एक्टको केंद्र में रखकर ठोस कदम उठाए जाएँ।