Rajasthan Update
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हाथों में फाइलें और डेढ़ घंटे मीटिंग, क्या मंत्रिमंडल फेरबदल और राज्य सभा उम्मीदवारों पर लगी मुहर?

जयपुर  ( 02 जून 2026)| राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार के गठन के बाद से अब तक की सबसे बड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राजनीतिक हलचल सोमवार को देश की राजधानी में देखने को मिली। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके आधिकारिक निवास पर एक लंबी और सघन समीक्षा बैठक की। सूत्रों के अनुसार, बंद कमरे में चली यह मुलाकात एक घंटे से भी ज़्यादा देर तक चली, जिसमें राजस्थान के विकास कार्यों के साथ-साथ राज्य के वर्तमान राजनीतिक और सांगठनिक परिदृश्य पर आमने-सामने विस्तृत चर्चा की गई। इस मुलाकात के बाद जो सबसे खास बात चर्चा का विषय बनी, वह थी बैठक की आधिकारिक तस्वीरें। आम तौर पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की मुलाकातों में गुलदस्ता देने या कोई राजस्थानी स्मृति चिन्ह भेंट करने की तस्वीरें ही सार्वजनिक की जाती हैं। लेकिन इस बार पहली बार एक ऐसी अनूठी तस्वीर जारी की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोनों के हाथों में दस्तावेजों और फाइलों का एक पुलिंदा नजर आ रहा है। इस गंभीर तस्वीर ने राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक गलियारों में अचानक से सस्पेंस और खलबली पैदा कर दी है।

राजस्थान कैबिनेट में खाली पड़े हैं 6 पद

प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई इस मैराथन बैठक के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि जून 2026 के महीने में ही राजस्थान सरकार के मंत्रिमंडल में एक बड़ा फेरबदल और विस्तार देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पिछले 3 महीनों के कार्यकाल के भीतर प्रधानमंत्री और केंद्रीय संगठन के नेताओं के साथ यह तीसरी बड़ी मुलाकात थी, जो इस बात को प्रमाणित करती है कि सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ चुकी है।

वर्तमान प्रशासनिक और संवैधानिक स्थिति को देखें तो राजस्थान कैबिनेट में इस समय मुख्यमंत्री और दो उप-मुख्यमंत्रियों सहित कुल 24 मंत्री शामिल हैं। सरकारी नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राजस्थान विधानसभा की कुल सीट क्षमता के आधार पर राज्य में अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि मंत्रिमंडल में अभी भी 6 पद पूरी तरह से खाली पड़े हैं।

आगामी पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए माना जा रहा है कि इस विस्तार में 4 से 6 नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल कर उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी।

‘नॉन-परफॉर्मिंग’ मंत्रियों की छुट्टी, बदलेंगे विभाग!

दिल्ली के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, यह आगामी राजनीतिक कदम केवल खाली पड़े पदों को भरने तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। यह वास्तव में एक बहुत बड़ा फेरबदल होगा। पिछले ढाई साल के कार्यकाल के दौरान जिन मंत्रियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है या जिनके विभागों में आम जनता की शिकायतें अधिक आई हैं, उन ‘नॉन-परफॉर्मिंग’ मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

इसके अलावा, सरकार के भीतर संतुलन और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कई भारी-भरकम और मलाईदार विभागों के पोर्टफोलियो में भी बड़ा फेरबदल किए जाने की पूरी तैयारी है। कुछ मंत्रियों के प्रभाव को कम किया जा सकता है, जबकि बेहतर काम करने वाले राज्य मंत्रियों को प्रमोट करके कैबिनेट रैंक दी जा सकती है।

इस बड़े बदलाव के जरिए मुख्यमंत्री और केंद्रीय आलाकमान पूरी ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक अमले को यह कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि पद पर बने रहने के लिए केवल राजनीतिक रसूख नहीं, बल्कि ठोस काम और परिणाम दिखाना ही एकमात्र पैमाना होगा।

जातिगत संतुलन साधने की तैयारी

इस पूरे मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य रणनीतिक उद्देश्य आगामी स्थानीय निकाय और ग्रामीण पंचायत चुनावों से पहले राजस्थान के सभी प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों और जातियों के समीकरणों को पूरी तरह से दुरुस्त करना है। राजस्थान की राजनीति हमेशा से क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन के इर्द-गिर्द घूमती रही है, इसलिए इस नई सूची में मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़, हाड़ौती और शेखावाटी जैसे बड़े अंचलों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व देने की योजना बनाई गई है।

वसुंधरा खेमे को भी मिल सकती है जगह

पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के आंतरिक असंतोष को रोकने और पूर्ण एकजुटता बनाए रखने के लिए इस बार गुटीय संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा बेहद जोरों पर है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खेमे के कुछ वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों को भी इस नए विस्तार में कैबिनेट या राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया जा सकता है। इससे न केवल सरकार का अनुभव बढ़ेगा, बल्कि संगठन के भीतर जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

क्या राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम भी तय? 

दिल्ली की इस लंबी बैठक का दूसरा सबसे बड़ा और तात्कालिक एजेंडा राजस्थान की 3 राज्यसभा सीटों पर होने वाला आगामी चुनाव है। राजस्थान में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव की तारीख 18 जून 2026 तय की गई है, जिसके लिए आधिकारिक नामांकन की प्रक्रिया 2 जून से देशव्यापी नियमों के तहत शुरू हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा अगले 1 से 2 दिनों के भीतर केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा किए जाने की पूरी संभावना है।

राजस्थान की 200 सदस्यों वाली मौजूदा विधानसभा में सीटों के गणित को देखें तो सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के पास अपने खुद के 118 विधायक मौजूद हैं। इस मजबूत संख्या बल के कारण भाजपा 3 में से 2 राज्यसभा सीटों पर बेहद आसानी से और बिना किसी राजनीतिक उलटफेर के जीत दर्ज कर रही है।

वहीं दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के खाते में विधानसभा के आंकड़ों के आधार पर केवल 1 सीट जाने की संभावना दिखाई दे रही है। भाजपा की इस कोर कमेटी ने पहले ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को नाम तय करने के लिए अधिकृत किया था, लेकिन अंतिमसूची पर अंतिम मुहर इसी दिल्ली बैठक के दौरान लगाई गई है।

बिट्टू-राठौड़-पूनिया के नामों पर मंथन!

भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान की इन 2 राज्यसभा सीटों के चयन में एक तरफ राष्ट्रीय स्तर के बड़े राजनीतिक चेहरों और दूसरी तरफ राज्य के मजबूत क्षेत्रीय व जातिगत समीकरणों (जैसे राजपूत, जाट और ओबीसी वर्ग) को एक साथ साधने की दोहरी रणनीति पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जिन प्रबल दावेदारों के नामों पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री के बीच गहन मंथन हुआ है, वे हैं:

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू: वर्तमान में खाली हो रही एक सीट से सांसद बिट्टू को पार्टी अपनी पहली प्राथमिकता वाली सीट से दोबारा (रिपीट) राज्यसभा भेज सकती है ताकि केंद्रीय कैबिनेट में उनका प्रतिनिधित्व सुचारू बना रहे।

राजेंद्र राठौड़: पूर्व नेता प्रतिपक्ष और शेखावाटी अंचल के एक बेहद कद्दावर राजपूत चेहरे के रूप में इनका नाम इस समय रेस में सबसे आगे और तेजी से चर्चा में बना हुआ है।

सतीश पूनिया: राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और प्रमुख जाट व ओबीसी (OBC) चेहरे के रूप में सामाजिक संतुलन बैठाने के लिए सतीश पूनिया के नाम पर भी शीर्ष स्तर पर विचार किया जा रहा है।

महिला व अन्य विशेष चेहरे: महिलाओं और गुर्जर समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर या सुनीता बैंसला के नाम की भी मजबूत दावेदारी है। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मजबूत बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने वाले बीकानेर के सुप्रसिद्ध उद्योगपति नरसी कुलरिया के नाम को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।

इस चुनाव की तय समय सीमा के अनुसार, 8 जून तक सभी उम्मीदवारों को अपने आधिकारिक नामांकन पत्र दाखिल करने होंगे। इसके बाद 18 जून 2026 को सुबह से मतदान और उसी दिन शाम को चुनाव के अंतिम नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।

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