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जयपुर, (9 मई 2025)। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को उत्तराखण्ड राज्य़ के कृषि मंत्री गणेश जोशी से पंत कृषि भवन में मुलाकात की। इस दौरान दोनों राज्यों के कृषि मंत्रियों ने एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट, ऑर्गेनिक खेती, बीज उत्पादन, जी आई टैग, जैतून और मिलेट्स उत्पादन पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में राजस्थान और उत्तराखण्ड में विविधिकरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में दोनों राज्यों में जो भी फसल, फल व सब्जियां आदि जलवायु उपयुक्त हैं, उन्हें बढ़ाने पर जोर दिया गया।
उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री ने बताया कि वहां नेचुरल फार्मिंग, औषधिय पौधे और सुगन्धित फूल, शहद और ड्रेगन न फ्रूट आदि की अच्छी पैदावार होती है, जिनमें से जलवायु अनुकूल पौधों की किस्मों को राजस्थान में भी लगाया जा सकता है। उन्होंने राजस्थान से एक प्रतिनिधि मण्ड़ल को उत्तराखण्ड और उत्तराखण्ड से एक प्रतिनिधि मण्ड़ल को राजस्थान भेजने का भी प्रस्ताव रखा। प्रतिनिधि मण्ड़ल एक-दूसरे राज्य की योजनाओं व उत्पादित की जा रही फसलों व फलों का अध्ययन कर अपने-अपने राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं को अपनाकर किसान हित में कार्य कर सकेंगे ।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि सोलर पम्प संयंत्र स्थापना में हमारा प्रदेश देश के प्रथम तीन राज्यों में से एक है और मिलेट्स उत्पादन में भी सर्वाेपरि है। प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम से कम करने और नैनो यूरिया और डीएपी के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। सरकार द्वारा अधिक से अधिक कृषि उत्पादों को जी आई टैग दिलाये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं, जिससे कृषकों को जी आई टैग प्राप्त फसलों का उचित मूल्य मिल सकेगा और प्रदेश का कृषक आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेगा।
उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री ने बताया कि मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए मिलेट्स बीज पर राज्य सरकार द्वारा सब्सिड़ी दी जा रही है। मशरूम उत्पादन राज्य में पूरे सालभर किया जाता है। बुरांश फ्लावर का बहुतायत मात्रा में उत्पादन किया जाता है। बुरांश के फूलों से बना शर्बत हृदय रोगियों के लिए अत्यन्त लाभकारी माना जाता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में कृषि विभाग द्वारा ‘हाऊस ऑफ हिमालया‘ एक संस्था बनाई गई है, जो कृषि उत्पादों की ब्राण्डिंग का काम करती है, जिससे वहां के कृषकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके।