Rajasthan Update - पढ़ें भारत और दुनिया के ताजा हिंदी समाचार, बॉलीवुड, मनोरंजन और खेल जगत के रोचक समाचार. ब्रेकिंग न्यूज़, वीडियो, ऑडियो और फ़ीचर ताज़ा ख़बरें. Read latest News in Hindi.
Right to Health Act को अनावश्यक बताने वाले स्वास्थ्य मंत्री के बयान की JSA राजस्थान कड़ी निंदा करता है
जयपुर(12फ़रवरी 2026)। स्वास्थ्य अभियान (JSA) राजस्थान, आज राजस्थान विधानसभा में माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर द्वारा दिए इस बयान, कि राज्य में Right to Health (RTH) Act की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि MAA योजना और निरोगी राजस्थान योजना जैसी योजनाओं के तहत पहले से ही निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, की कड़ी निंदा करता है।
JSA राजस्थान का स्पष्ट मत है कि Right to Health Act को केवल निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के समकक्ष मानना कानून और उसकी मंशा की गंभीर गलत समझ को दर्शाता है। Right to Health Act केवल निःशुल्क उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अधिकार-आधारित और कानूनी रूप से लागू किए जा सकने वाले सव्सथ्य ढाँचे की स्थापना करता है, जिसका उद्देश्य जवाबदेही, पारदर्शिता और मरीज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य मंत्री का बयान Right to Health Act के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों की पूरी तरह अनदेखी करता है, जैसे :
· मरीज़ों के अधिकारों की स्पष्ट मान्यता, जैसे गरिमापूर्ण इलाज का अधिकार, सूचित सहमति का अधिकार, जानकारी पाने का अधिकार, भेदभाव-रहित उपचार तथा सम्मानजनक देखभाल।
· बिना अग्रिम भुगतान के आपातकालीन चिकित्सा उपचार का अधिकार, जिसके अंतर्गत निजी अस्पतालों द्वारा भी आपात स्थिति में स्थिरीकरण एवं आवश्यक इलाज प्रदान करना अनिवार्य है।
· एक संरचित एवं समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था, जिससे इलाज से इनकार, लापरवाही या उत्पीड़न की स्थिति में नागरिक न्याय प्राप्त कर सकें।
· जिला एवं राज्य स्तर पर स्वास्थ्य प्राधिकरणों का गठन, जिनका दायित्व अधिनियम के क्रियान्वयन की निगरानी, शिकायतों की सुनवाई और पूरे स्वास्थ्य तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
· सरकार की स्पष्ट रूप से परिभाषित जिम्मेदारियाँ, जिनके तहत राज्य को स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी बनाया गया है।
JSA राजस्थान यह रेखांकित करता है कि सरकारी योजनाएँ नीतिगत निर्णय होती हैं, जिन्हें किसी भी समय बदला, सीमित या समाप्त किया जा सकता है, जबकि कानून नागरिकों को ऐसे अधिकार देता है जिन्हें वे कानूनी रूप से दावा कर सकते हैं। बिना लागू किए जा सकने वाले अधिकारों के केवल निःशुल्क सेवाएँ मरीज़ों को इलाज से इनकार, मनमाने रेफरल या शोषण से सुरक्षा नहीं देतीं—और ये समस्याएँ आज भी राजस्थान में व्यापक रूप से मौजूद हैं।
राज्य में जहाँ नागरिकों को आज भी इलाज से इनकार, निजी अस्पतालों द्वारा मनमानी वसूली, आपात स्थितियों में जवाबदेही की कमी तथा प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था के अभाव का सामना करना पड़ रहा है, वहाँ Right to Health Act को अनावश्यक बताना ज़मीनी सच्चाइयों से मुँह मोड़ने जैसा है।
*जन स्वास्थ्य अभियान, राजस्थान, राज्य सरकार और माननीय स्वास्थ्य मंत्री से मांग करता है कि वे:*
*1. Right to Health Act के पूर्ण दायरे और उद्देश्य को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करें एवं अपना बयां वापस लें।*
*2. अधिनियम को व्यवहार में लागू करने हेतु आवश्यक नियमों को तत्काल तैयार कर अधिसूचित करें।*
*3. भ्रामक सार्वजनिक बयानों के माध्यम से कानून को कमजोर करने के बजाय, इसके तहत निर्धारित संस्थागत तंत्र को सशक्त करें।
स्मरणीय हो, कि Right to Health Act को मार्च 2023 में पूर्ववर्ती राज्य सरकार द्वारा वर्षों के जन-संवाद और जन-अभियान के बाद पारित किया गया था। किंतु लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद, आज तक इसके आवश्यक नियम नहीं बनाए गए हैं, जिसके कारण यह कानून अभी भी बड़े स्तर पर लागू नहीं हो पाया है। अधिनियम की प्रासंगिकता पर सवाल उठाने के बजाय, वर्तमान सरकार को इसकी प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभानी चाहिए और अपने वैधानिक दायित्वों को पूरा करना चाहिए।