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पीएम-कुसुम सौर ऊर्जा संयंत्रों का अवलोकन- वरदान साबित हो रहे हैं

सौर ऊर्जा संयंत्र ग्रीन एनर्जी को मिल रही गति- मुख्य सचिव

जयपुऱ, (14 जनवरी 2026)। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत राज्य में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों ने प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार किया है। राजस्थान को ऊर्जा उत्पादन में सरप्लस राज्य बनाने के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन को साकार करने में इस योजना का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने यह बात बुधवार को कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर उपखंड स्थित भूपसेड़ा गांव में कुसुम योजना के अन्तर्गत स्थापित सौर ऊर्जा संयत्रों के अवलोकन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कुसुम योजना का लाभ उठाकर अन्नदाता अब ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। इनसे उत्पन्न सौर ऊर्जा का उपयोग किसानों को दिन में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में हो रहा है।

ग्रामीण विकास को मिल रही मजबूती’-

मुख्य सचिव ने कहा कि भारत सरकार की यह योजना राज्य सरकार के सहयोग से प्रदेश में ग्रामीण विकास को मजबूती प्रदान कर रही है। घटक-ए और घटक-सी के अंतर्गत किसान या तो स्वयं सौर संयंत्र स्थापित कर रहे हैं या अपनी अनुपयोगी भूमि लीज पर देकर आर्थिक लाभ प्राप्त कर पा रहे हैं।

बलवीर की सफलता ने दी प्रेरणा’-

उन्होंने कहा कि राज्य में विकेंद्रित सौर ऊर्जा परियोजनाओं को मिल रही गति ग्रीन एनर्जी क्रांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम है जो आने वाले समय में ग्राम सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। मुख्य सचिव ने प्रसन्नता व्यक्त की कि कुसुम कंपोनेंट-ए में राजस्थान देश में प्रथम और कंपोनेंट-सी में द्वितीय स्थान पर है। उन्होंने कहा कि भूपसेड़ा में प्रगतिशील किसान बलवीर सिंह मोगर ने सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया और उनसे प्रेरित होकर इस क्षेत्र के कई किसान योजना से जुड़कर ऊर्जादाता भी बन चुके हैं। यह इस योजना को जमीनी स्तर पर मिल रही अभूतपूर्व सफलता को दर्शाता है।

’2800 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित’-

राजस्थान डिस्कॉम्स की चेयरमैन आरती डोगरा ने बताया कि प्रदेश में लगभग 2800 मेगावाट क्षमता की 1274 परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इन परियोजनाओं के कारण सुलभ हो रही ऊर्जा से लोगों के सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में बदलाव आया है। निर्बाध बिजली मिलने से गांवों में छोटे-छोटे व्यवसाय पनप गए हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलने लगा है। विद्युत वितरण निगमों को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध हो रही है। प्रदेश में 1 लाख 75 हजार से अधिक किसानों को दिन में बिजली दे पाना संभव हुआ है।

गौरतलब है कि भूपसेडा में 5-5 हैक्टेयर क्षेत्र में बने दोनों प्लांट्स से कल्याण नगर और बालावास जीएसएस से जुड़े फीडरों पर क्षेत्रवासियों को भरपूर बिजली मिल रही है। साथ ही बानसूर क्षेत्र में करीब 10 प्लांट स्थापित हो चुके हैं। जिनसे करीब 4 हजार किसानों को दिन में विद्युत आपूर्ति कर लाभान्वित किया जा रहा है। कल्याण नगर में 310 एवं बालावास में 362 कृषि उपभोक्ताओं को दिन में विद्युत आपूर्ति कर लाभान्वित किया जा रहा है। इस दौरान जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी और जिला पुलिस अधीक्षक देवेंद्र बिश्नोई भी मौजूद रहे।

’प्रगतिशील किसानों से संवाद’-

मुख्य सचिव ने इस दौरान ग्रामीणों से भी बातचीत की। देवकरण, श्री अमीचन्द तथा विशंभर आदि किसानों ने बताया कि दिन में सिंचाई के लिए बिजली मिलने से अब सर्दी में रात को जागना नहीं पड़ता। घर-परिवार को अधिक समय दे पाते हैं।

तेल मिल चलाने वाले नरेश, आटा चक्की लगाने वाले शेरसिंह ने बताया कि इन प्लांटों के कारण बिजली जाना लगभग बंद हो गई है। जिसका फायदा उन्हें अपने व्यवसाय में हो रहा है। अब अधिक उत्पादन कर पाते हैं। आमदनी बेहतर हो गई है। सौर संयंत्रों से जुड़े फीडरों में वरीयता खत्म होने के कारण तत्काल कृषि कनेक्शन प्राप्त करने वाले किसान अभयसिंह तथा राधेश्याम ने बताया कि यदि यह योजना नहीं होती तो उन्हें कृषि कनेक्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता। अब मांग पत्र जमा करते ही उन्हें तत्काल कनेक्शन मिल गया।

जयपुर विद्युत वितरण निगम के अधीक्षण अभियंता मनोज गुप्ता ने बताया कि जिले में कुसुम योजना के अन्तर्गत कुल 21 प्लांट स्थापित किए गए हैं। करीब 49 मेगावाट क्षमता के इन प्लांटों से प्रतिमाह लगभग 61 लाख यूनिट का उत्पादन हो रहा है।

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