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राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट-2026, ‘ड्राइविंग इंपैक्ट थ्रू इंस्टीट्यूशनल लीडरशिप’
पैनल डिस्कशन संस्थागत नेतृत्व से सामाजिक परिवर्तन की दिशा तय करेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
जयपुर, (6 जनवरी 2026)। सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट–टाई ग्लोबल समिट 2026 के अंतर्गत मंगलवार को मुख्य हॉल में सफल उद्यमियों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने नेतृत्व, नवाचार और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए। समिट के अंतर्गत ‘ड्राइविंग इंपैक्ट थ्रू इंस्टीट्यूशनल लीडरशिप’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों के दौर में संस्थानों की बदलती भूमिका पर विशेष रूप से चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्र के संदर्भ में गहन विमर्श किया गया।
पैनल चर्चा की अध्यक्षता टाई राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. शीनू झवर ने की। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीकों ने संस्थागत कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है। आज नेतृत्व की भूमिका केवल प्रशासनिक प्रबंधन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि तकनीक को मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ संतुलित करना आधुनिक नेतृत्व की सबसे बड़ी चुनौती और आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि प्रभावी संस्थागत नेतृत्व ही तकनीकी परिवर्तन को समाज के हित में दिशा दे सकता है।
पैनल चर्चा में पाथ के कंट्री डायरेक्टर नीरज जैन ने कहा कि एआई और डेटा आधारित नवाचार स्वास्थ्य एवं सामाजिक विकास के क्षेत्र में निर्णय प्रक्रिया को अधिक सटीक, त्वरित और प्रभावी बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच दूरदराज, ग्रामीण और वंचित वर्गों तक सुनिश्चित की जा सकती है, बशर्ते संस्थान स्पष्ट विजन, मजबूत नेतृत्व और दीर्घकालिक रणनीति के साथ कार्य करें।
विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी के सीईओ एवं ट्रस्टी ओमकार बगड़िया ने शिक्षा क्षेत्र में एआई और नई तकनीकों के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्य की शिक्षा केवल पाठ्यक्रम आधारित नहीं होगी, बल्कि कौशल विकास, नवाचार और समस्या समाधान पर केंद्रित होगी। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित करते हुए विद्यार्थियों को उद्योग, अनुसंधान और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना होगा।
चित्तौड़गढ़ के राजकीय मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अतुल तिवारी ने चिकित्सा क्षेत्र में एआई और तकनीकी नवाचारों के उपयोग पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, सटीकता और गति में उल्लेखनीय सुधार किया है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के उपयोग के साथ-साथ नैतिकता, मानवीय संवेदना और चिकित्सकीय विवेक को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।