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शासन सचिव ने किया पशुपालन, मत्स्य और गोपालन विभाग का आकस्मिक निरीक्षण

जयपुर, (18 दिसम्बर 2025)। पशुपालन, मत्स्य एवं गौ-पालन विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने पशुपालन और गोपालन निदेशालय तथा मत्स्य विभाग का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालयों की कार्यप्रणाली, उपस्थिति व्यवस्था, फाईल निस्तारण की स्थिति तथा ई वेस्ट का निस्तारण आदि मुद्दों की समीक्षा की। उन्होंने कार्यालयों में साफ सफाई, रेकार्ड संधारण तथा ई—गवर्नेंस से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की तथा आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित निदेशकों को निर्देश दिए कि जो भी कमियां हैं उन्हें जनवरी माह में होने वाले पुनः निरीक्षण से पहले दूर कर लिया जाए।

विभागों में अधिकतर अधिकारी और कार्मिक उपस्थित पाये गए। शासन सचिव ने अनुपस्थित पाए गए अधिकारियों और कार्मिकों के प्रति नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। डॉ. शर्मा ने अधिकारियों तथा कर्मचारियों को कार्य समय में कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए और कहा कि बिना पूर्व सूचना एवं अनुमति के कार्यालय छोड़ने की स्थिति नहीं होनी चाहिए। शासन सचिव ने विभागाध्यक्षों को नकारा सामान व कबाड़ की नीलामी आदि सुनिश्चित कर कार्यालय को व्यवस्थित और स्वच्छ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने ई वेस्ट के निस्तारण पर विशेष फोकस कर जल्द से जल्द कार्य को संपन्न करने के निर्देश दिए। डॉ शर्मा ने निर्देश दिया कि इस कार्य के लिए एक नोडल प्रभारी बनाकर जल्द से जल्द इस कार्य को संपन्न किया जाए। डॉ शर्मा ने कहा कि फाइलों के निस्तारण की समयावधि अब भी काफी अधिक है इसे कम किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने विभागों के बिल भुगतान की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन करने के निर्देश दिए। साथ ही कार्यालय में प्राप्त होने वाली डाक के भी समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए

शासन सचिव ने कहा कि विभागों की कार्यव्यवस्था को सुधारने के लिए अभी भी काफी कुछ किया जाना है। उन्होंने कुछ अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अनुशासन की व्यवस्था उच्च स्तर से ही होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को अनुशासन, सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, सेवा भावना और समर्पण के साथ कार्य करने के निर्देश दिये। सुशासन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर कार्य में किसी तरह की अनियमितता या कोताही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागीय अनुशासन एवं कार्य संस्कृति को और सुदृढ़ किया जाए, जिससे जनविश्वास में वृद्धि हो।

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