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छह महीने तक चले मंथन के बाद गठित हुआ झुंझुनूं प्रगति संस्थान

पलायन रोकना होगा, इसके लिए पॉजीटिव सोच जरूरी - डॉ. मोदी

झुंझुनूं (2 मार्च 2025)। शहर के विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रबुद्धजनों के बीच चल रही राजनीति से परे एक विकसित झुंझुनूं की सोच ने रविवार को झुंझुनूं प्रगति संस्थान के रूप में आकार लिया है। रविवार को झुंझुनूं को स्मार्ट, हेल्दी, विकसित झुंझुनूं बनाने के लिए झुंझुनूं प्रगति संस्थान की स्थापना की गई। इस मौके पर मुनि आश्रम पाटोदिया गेस्ट हाउस में स्थापना व शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्टेट जीएसटी के ज्वाइंट कमिश्नर उमेश जालान थे। अध्यक्षता शिक्षा विभाग से रिटायर्ड ज्वाइंट डायरेक्टर हरिराम महण ने की। जबकि विशिष्ट अतिथियों के रूप में महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष सत्यदेव दड़िया, वस्त्र व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पवन गाडिया, पूर्व वाइस चेयरमैन पवन पुजारी, श्रीगोपाल गौशाला अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया, कृषि वैज्ञानिक डॉ. हनुमानप्रसाद, परमेश्वरलाल हलवाई, जिला गौ सेवा समिति अध्यक्ष ताराचंद गुप्ता भोडकीवाला, कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर दिलीप मोदी एवं नगर परिषद के पूर्व आयुक्त राजेंद्र जोशी मंच पर मौजूद थे। अतिथियों का स्वागत सुभाष क्यामसरिया, डॉ. नवीन बंसल, कैलाशचंद्र सिंघानिया, रघुनाथ पोद्दार, रूपेश तुलस्यान, अंजनी जालान, श्यामसुंदर टीबड़ा, संदीप केडिया, कमल केजरीवाल, गणेश हलवाई चिडावावाला, राकेश टीब़डा, नारायण जालान, विनोद सिंघानिया, रूपेश तुलस्यान, श्रीकांत पंसारी, दिलीप हंसासरिया, अजीत राणासरिया, सुभाष मित्तल मोना मित्तल, नवीन केडिया आदि ने किया। इस मौके पर सबसे पहले सामाजि​क चिंतक परमेश्वरलाल हलवाई ने छह महीनों से चल रहे मंथन को सभी के समक्ष रखा और कहा कि राजनीति से हटकर समाज का एक प्रबुद्ध वर्ग यह चाहता है कि झुंझुनूं की पहचान राणी सती दादी मंदिर के साथ—साथ उसके बनाए गए उत्पाद, उसके द्वारा स्वच्छता—सौंदर्यता की दिशा में किए गए नवाचार, उसके द्वारा किए गए वो बदलाव जो अन्य शहरों के लिए प्रेरणा साबित हो। इस तरह से भी होनी चाहिए। इसलिए झुंझुनूं प्रगति संस्थान का गठन किया गया है। जिसमें ना केवल स्थानीय लोग तो शामिल है ही। साथ ही साथ प्रवासी लोगों का भी सहयोग रहेगा। इसके बाद संगठन की पहली और नई कार्यकारिणी की घोषणा ताराचंद गुप्ता द्वारा सर्वसम्मति से की गई। जिसमें पिछले चार दशकों से झुंझुनूं को एजुकेशन हब के रूप में बनाने के लिए प्रयासरत विजनरी लीडर डॉ. दिलीप मोदी को अध्यक्ष चुना गया। वहीं युवा अधिवक्ता एडवोकेट अशोक शर्मा को सचिव एवं वस्त्र व्यवसायी संजय नांगलिया को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। कार्यकारिणी में पदाधिकारियों समेत कुल 20 सदस्यों को जगह देने के साथ—साथ अलग—अलग जिम्मेदारियां दी गई है। इस मौके पर नव निर्वाचित अध्यक्ष शिक्षाविद् डॉ. दिलीप मोदी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने झुंझुनूं को अपने जीवन के महत्वपूर्ण चार दशक से ज्यादा का समय दिया है। झुंझुनूं ने उन्हें मान—सम्मान के अलावा वो पहचान दिलाई है। जिसके बलबूते पर आज झुंझुनूं एकेडमी देश के कोने—कोने में नहीं। बल्कि भारत के पड़ौसी देश नेपाल समेत अन्य जगहों पर अपनी पहचान रखती है। वहां से बच्चे पढने झुंझुनूं तक आते है। लेकिन एक टसक उनके मन में हमेशा रही। जिसे पूरा करने के लिए झुंझुनूं प्रगति संस्थान का गठन किया गया है। झुंझुनूं को आज भी वो पहचान नहीं मिल पाई। जिसका वो हकदार था। हमारा पैसा और प्रतिभा तो कई सालों से पलायन हो ही रहा था। लेकिन यहां के लोग, यानि कि पिपुल भी पलायन हो रहे है। हम यदि झुंझुनूं को हमेशा जवान ही रहने देना चाहते है। तो हमें युवाओं का पलायन रोकना होगा। उन्हें स्कॉप बाहर ढूंढने की बजाय झुंझुनूं में ही ढूंढकर बनाने और दूसरे को उसके लिए प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। उन्होंने कहा कि आज हम शिक्षा के क्षेत्र में देखें या फिर अन्य बड़े सुपर मार्केट को देखें। हमारा झुंझुनूं का पैसा बाहर जा रहा है। ऐसे ही पैसा बाहर जाता रहा तो एक दिन झुंझुनूं की हालत क्या होगी यह अंदाजा लगाना भी रोंगटे खड़े करने जैसा है। इसलिए अभी संभलने का वक्त है। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. हनुमानप्रसाद ने सभी पदाधिकारियों को शपथ दिलवाई और सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. डीएन तुलस्यान तथा सत्यनारायण शर्मा ने किया।

कार्यक्रम में इन लोगों की रही मौजूदगी –

इस मौके पर भामाशाह विश्वनाथ टीबड़ेवाला, सुरेश जाखड़, विजयगोपाल मोटासरा, सुरेंद्र अग्रवाल चिड़ावावाला, गणेश हलवाई चिड़ावावाला, विनोद सिंघानिया, नरेश परसरामपुरिया, बंटी टीबड़ा, सीए रविंद्र मोरोलिया, एडवोकेट अंशुमान शेखावत, सीए जिम्मी मोदी, आशुतोष—आकाश मोदी, अमरनाथ जांगिड़, प्रदीप पाटोदिया, राजेश ढेढिया, शिवचरण हलवाई, संजय पारीक, मनीष मित्तल, कुंदन सिंगडोदिया, अशोक सोनी, श्रीकांत पंसारी, संजू राणासरिया, शिवकुमार जांगिड़, विकास तुलस्यान, लॉयंस क्लब की अध्यक्षा डॉ. बबिता कुमावत, डॉ. ममता जालान, डॉ. शशि मोरोलिया, डॉक्टर शालू टीबड़ा, डॉ. संगीता केडिया उदयपुरिया, प्रेरणा तुलस्यान एवं विनीता शर्मा आदि उपस्थिति थी।

सोच बदलनी होगी, ट्रेन जा नहीं रही, आ रही है –

झुंझुनूं प्रगति संस्थान के नवनिर्वाचित अध्यक्ष शिक्षाविद् डॉ. दिलीप मोदी ने बताया कि पैसा और प्रतिभा पलायन रोकने के लिए सबसे पहले हमें सोच बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि कोई भी रेल सेवा शुरू होती है तो हम बोलते है कि झुंझुनूं से उस जगह जाने के लिए रेल सेवा शुरू हो गई है। लेकिन इसे हमें बदलना होगा। हमें यह सोचना, समझना और बोलना होगा कि उस जगह से झुंझुनूं रेल आ रही है। यानि कि पैसा आ रहा है। प्रतिभा आ रही है और यह जब दोनों आएंगे तो एक नया झुंझुनूं आ रहा है। यह परिकल्पना हर मन में बसेगी।

*महिला और यूथ विंग भी होगी अलग से गठित*
इस मौके पर डॉ. दिलीप मोदी ने बताया कि झुंझुनूं प्रगति संस्थान में जल्द ही एक महिला और यूथ विंग का गठन किया जाएगा। जिसकी लगभग तैयारी पूरी हो गई है। मुख्य टीम के साथ महिला टीम और युवा टीम भी झुंझुनूं शहर की​ महिलाओं और युवाओं को इस विकसित झुंझुनूं के आंदोलन में जोड़ेगी।

अधूरे कार्यों को पूरा करवाएंगे, वॉकल फॉर लॉकल होगी थीम –

इस मौके पर डॉ. दिलीप मोदी ने बताया कि झुंझुनूं शहर में आज भी ऐसे कई कार्य अधूरे है। जिसे पूरा करना जरूरी है। इसलिए उन कार्यों को लॉन्ग टर्म, मिड टर्म और शॉर्अ टर्म के आधार पर सूचीबद्ध किया जा रहा है। इसके लिए शासन, प्रशासन, सरकार, जनप्रतिनिधि, जिनसे भी बातचीत करनी पड़ेगी। जिन पर भी दबाव बनाना होगा। वह कार्य किया जएगा। हमारा मानना है कि यदि वॉकल फॉर लॉकल की धारणा को हम साकार बना पाएंगे। तो झुंझुनूं की प्रगति को कोई रोक नहीं सकता। हमारी दुकानों पर ही सामान खरीदना। हमारे बाजारों को ही पनपाना। हमारे बच्चों को झुंझुनूं में ही पढाना। हमारे बच्चों के लिए झुंझुनूं में रोजगार के लिए इनोवेशन करना। हमारे पर्यटन स्थलों को विकसित करना। इस तरह के कई मुद्दे है। जिन पर हम सिर्फ सोच बदलकर झुंझुनूं को बदल सकते है। इसी क्रम में झुंझुनूं में एक स्वच्छ, सुंदर और आकर्षक चौपाटी बनें। इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रयास शुरू किए जाएंगे।

झुंझुनू में नवनिर्माणाधीन इस्कॉन मंदिर के संचालक डॉक्टर नवीन बंसल ने अपने उद्बोधन में आध्यात्मिक कार्य के बारे में बताते हुए संस्था को आश्वासन दिया कि झुंझुनू की प्रगति में वह हर संभव अपने और अपने संगठन की ओर से कार्य करेंगे। उन्होंने कृष्ण भगवान का स्मरण करते हुए श्लोक भी सुनाये।

कार्यकारिणी के साथ—साथ मार्गदर्शक मंडल का हुआ गठन –

इस मौके पर नई कार्यकारिणी के साथ—साथ मार्गदर्शक मंडल का भी गठन हुआ। मार्गदर्शक मंडल में ताराचंद गुप्ता भोड़कीवाला, एडवोकेट श्रवण कुमार केजड़ीवाल, परमेश्वरलाल हलवाई, डॉ. हनुमानप्रसाद, हरिराम महण, नरेश गाडिया, पवन गाडिया, सत्यदेव दड़िया, प्रमोद खंडेलिया, पवन पुजारी व शिवचरण पुरोहित को शामिल किया गया है। इसके अलावा कार्यकारिणी में डॉ. दिलीप मोदी अध्यक्ष, राजेंद्र जोशी, प्रदीप पाटोदिया व कुरड़ाराम धींवा उपाध्यक्ष, एडवोकेट अशोक शर्मा, सचिव, योगेश खंडेलिया व भंवरलाल स्वामी सह सचिव, संजय नांगलिया कोषाध्यक्ष, अशोक केडिया सह कोषाध्यक्ष व डॉ. डीएन तुलस्यान को पीआरओ की जिम्मेदारी दी गई। कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में सीए पवन केडिया, नेमी अग्रवाल, राजेश ढेढिया, नरेंद्र, व्यास, हरिश तुलस्यान, मुरारी सैनी, शिवकुमार जांगिड़, प्रमेंद्र कुल्हार, सत्यनारायण शर्मा, नितेश मोरवाल को शामिल किया गया।

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