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डेरी-बसंतगढ़ पाॅलिमेटेलिक बेल्ट में तांबा, शीशा, जस्ता, सह खनिज के भण्डार, विस्तृत खोज और खनन की कार्ययोजना

एसीएस माइंस अपर्णा अरोरा ने की वरिष्ठ विशेषज्ञ अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक -सदर्न देहली फोल्ड पाॅलिमेटेलिक अम्बाजी-डेरी-बसंतगढ़ बेल्ट ंइन खनिजों की संभावनाभरा बेल्ट

जयपुर, (14 अगस्त 2026)। सिरोही आबुरोड़ के डेरी व आसपास के क्षेत्र में तांबा, शीशा, जस्ता और सह खनिज भण्डार के आरंभिंक संकेत उत्साहजनक मिले है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जो स्वयं खान मंत्री भी है के दिशानिर्देशों के अनुसरण में खान विभाग ने आबुरोड के डेरी, बंसतगढ़ व आसपास के क्षेत्र में अतिमहत्वपूर्ण खनिज काॅपर, लेड, जिंक और एसोसिएटेड खनिजों के भण्डार की विपुल संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में विस्तृत खोज एवं खनन शुरु कराने की कार्ययोजना तैयार की जा रही हंै। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस श्रीमती अपर्णा अरोरा ने इस संबंध में आरएसएमएम के प्रबंध निदेशक, खान एवं आरएसएमएम व जीएमआरआईसी के वरिष्ठ अधिकारियोें के साथ बैठक की और भावी रणनीति पर चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान मेजर मिनरल ब्लाॅकों की नीलामी में देश में अव्वल होने के साथ ही दुर्लभ खनिज रेयर अर्थ एलिमेंट्स का एक्सप्लोरेशन लाइसेंस जारी करने वाला देश का पहला प्रदेश बन गया है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम  अरोड़ा ने बताया कि सदर्न देहली फोल्ड पाॅलिमेटेलिक बेल्ट अम्बाजी-डेरी-बसंतगढ़ व आसपास का इलाका ंइन खनिजों की विपुल संभावनायुक्त बेल्ट है और इस क्षेत्र में हमें तत्काल एक्सप्लोरेशन कार्य आरंभ करते हुए खनिज भण्डारोें का वास्तविक आकलन करना होगा। उन्होंने इसके लिए राजस्थान माइंस एवं मिनरल्स आरएसएमएम को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
एसीएस माइंस  अरोड़ा ने कहा कि डेरी, बंसतगढ़ व आसपास के क्षेत्र में अब तक के उपलब्ध एक्सप्लोरेशन परिणामों के डेटा साझा करते हुए विशेषज्ञ संस्थाओं से विश्लेषण कराया जाएं। इसके लिए आरएसएमएम को एक्सप्लोरेशन मैनेजमेंट कंसलटेंस की भी सहायता लेते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि इस बेल्ट में काॅपर के साथ ही लेड-जिंक व एसोसिएटेड खनिजों के भण्डार है। इन खनिजों के संभावित भण्डारों के आकलन और उसके एक्सप्लोरेशन व खनन से देश और प्रदेश की इकोनोमी को बूस्टअप मिल सकेगा। भूमिगत खनन तकनीक से इस क्षेत्र में खनन कार्य होगा। उन्होंने बताया कि अंबाजी के आसपास के इलाके में गुजरात सरकार द्वारा पहले से ही खनन परियोजनाओं का संचालन किया जा रहा है।
एसीएस अरोड़ा ने आरएसएमएम को खनिजों के उत्पादन को बढ़ाने और कार्यों में विविधिकरण लाने के भी निर्देश दिए।
गुजरात सरकार की गुजरात मिनरल रिसर्च एण्ड इण्डस्ट्रीयल कंसलटेंसी के मुख्यकार्यकारी अधिकारी डाॅ. डीके सिंहा ने प्रजेंटेशन देते हुए बताया कि अंबाजी-डेरी-बसंतगढ़ क्षेत्र में खनिज खोज की आधुनिकतम तकनीकों से फर्दर एक्सप्लोरेशन कर खनिज भण्डारों और उनकी गुणवत्ता की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोमेग्नेटिक सर्वे आदि तकनीक का उपयोग कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। उन्होंने उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कराकर डेरी माइंस मेें  खनन और एक्सप्लोरेशन दोनों कार्य एक साथ शुरु करने का सुझाव दिया।
आरएसएमएम के प्रबंध निदेशक पी. रमेश ने बताया कि डेरी-बसंतगढ़ ब्लाॅक में काॅपर, लेड-जिंक व अन्य खनिजों के संकेत को देखते हुए आरएसएमएम इस क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ायेगा। उन्होंने बताया कि आरएसएमएम के पास उपलब्ध डेटा का साझा कर विशेषज्ञ संस्थाओं से विश्लेषण कराया जाएगा ताकि महत्वपूर्ण खनिजों का खनन कार्य आरंभ किया जा सके।
इस अवसर पर विशिष्ट सचिव  नम्रता वृष्णि, निदेशक माइंस  महावीर प्रसाद मीणा, ओएसडी   कृष्ण शर्मा, एडीजी जयपुर आलोक प्रकाश जैन, एसजी संजय सक्सेना,  सुनील कुमार वर्मा और आरएसएमएम के जीजीएम अरुण सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

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