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सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के प्रकरणों में ‘जीरो टॉलरेंस’ टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार के तत्कालीन महाप्रबंधक बर्खास्त

जांच में आरोप प्रमाणित पाये जाने पर कार्रवाई अनियमितताओं के मामलों में कठोर कार्रवाई रहेगी जारी शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता

जयपुर, (15 मई 2026)।  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक की मंशा के अनुरूप सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के प्रकरणों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इसी क्रम में रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने कठोर कार्रवाई करते हुए टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार के तत्कालीन महाप्रबंधक करूणेश कुमार सोनी को सेवा से बर्खास्त किया है। जांच में करोड़ों रुपये के गबन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, अनधिकृत भुगतान तथा संस्थान को आर्थिक क्षति पहुंचाने जैसे गंभीर मामले प्रमाणित पाये जाने पर यह कार्रवाई की गई है।

 वर्ष 2012-13 से 2015-16 के दौरान टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार में वित्तीय लेन-देन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आईं थी। जांच में लगभग 4.80 करोड़ रुपये की अमानत राशि के गबन एवं दुरुपयोग के आरोप प्रमाणित पाए गए। साथ ही, बैंक खातों से नकद राशि के कपटपूर्वक आहरण तथा अनधिकृत व्यक्तियों को भुगतान कर भण्डार को गंभीर आर्थिक हानि पहुंचाने, भण्डार को शास्ति की हानि पहुंचाने, विभिन्न व्यक्तियों व संस्थाओं से अमानतें प्राप्त कर भण्डार की लेखा पुस्तिकाओं में इन्द्राज नहीं किए जाने, राशि का षड़यंत्रपूर्वक अपहरण कर भण्डार की साख को हानि पहुंचाने, कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने तथा राज्य सरकार की छवि को धूमिल करने के आरोप भी प्रमाणित पाये गए। इस पर सख्त रूख अपनाते हुए राजस्थान सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन कन्ट्रोल एंड अपील) नियम 1958 के नियम 16 के तहत करूणेश कुमार सोनी का सेवा से निष्कासन किया गया है।

वर्ष 2015 में प्रकरण प्रकाश में आने के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। इसके बाद विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच प्रारंभ की गई। मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत पुलिस द्वारा आरोप पत्र भी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए चारों प्रमुख आरोप प्रमाणित माने गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित अधिकारी द्वारा अपने प्रशासनिक एवं वित्तीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण संस्था को आर्थिक एवं प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नुकसान उठाना पड़ा। विभागीय जांच प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों का परीक्षण, बैंक रिकॉर्ड का सत्यापन तथा संबंधित पक्षों की व्यक्तिगत सुनवाई की गई।

सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने स्पष्ट किया है कि सहकारी संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सुशासन सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। विभाग द्वारा भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के सभी मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएं आमजन एवं किसानों के विश्वास का महत्वपूर्ण आधार हैं, इनमें किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता तथा सरकारी धन के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शासन सचिव ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी तथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनुशासन को और अधिक मजबूत करने के लिए नियमित ऑडिट, निरीक्षण एवं निगरानी तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि सहकारिता व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और आमजन का विश्वास मजबूत हो।

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