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जयपुर, (31 मार्च 2026)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा और पहल पर प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष में राजस्व न्यायालय में लंबित वादों के शीघ्र और समयबद्ध निस्तारण पर विशेष फोकस रहेगा। इसके लिए उपखंड एवं तहसील से लेकर जिला एवं संभाग स्तर के राजस्व अधिकारियों को विशेष टास्क दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री निर्देशों के क्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य में राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के त्वरित निस्तारण के प्रदेश के समस्त राजस्व अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध बनाते हुए आमजन को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्य सचिव की ओर से जारी परिपत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रदेश में लंबित वादों के शीघ्र निस्तारण के लिए पूर्व में भी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की जा चुकी है, किन्तु नोटिस तामील में देरी, रिकॉर्ड उपलब्ध न होना तथा साक्ष्य एवं जिरह के बीच अनावश्यक अंतराल जैसे कारणों से प्रकरणों के निस्तारण में विलंब हो रहा है। इस गैप को दूर करने के लिए राजस्व न्यायालय में वादों के निस्तारण की समस्त प्रक्रिया की राज्य सरकार के स्तर से सघन मॉनिटरिंग की जाएगी।
राजस्व अधिकारियों को प्रत्येक कार्य दिवस को 4 घंटे नियमित न्यायालय संचालन के निर्देश
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सभी राजस्व पीठासीन अधिकारी प्रत्येक कार्य दिवस में प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक नियमित रूप से न्यायालय संचालन सुनिश्चित करें। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों में तामील प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक होने पर समाचार पत्रों के माध्यम से भी तामील करवाई जाए।
एक अप्रैल 2026 की स्थिति में सबसे पुराने 100 लम्बित वादों की बनेगी सूची
परिपत्र के अनुसार, उपखण्ड अधिकारी एवं सहायक कलेक्टर 01 अप्रैल 2026 की स्थिति में 100 सबसे पुराने लंबित वादों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता से निस्तारित करेंगे। इन प्रकरणों की मासिक समीक्षा कर चालू वित्तीय वर्ष में उनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
संभागीय आयुक्त-जिला कलक्टर्स को नियमित निरीक्षण के निर्देश
इसके साथ ही संभागीय आयुक्त एवं जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे नियमित निरीक्षण कर न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार सुनिश्चित करें तथा इसकी रिपोर्ट राजस्व मण्डल को भेजें।
पुराने मामलों में समय अभिलेख नहीं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
मुख्य सचिव की ओर से जारी परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि अत्यधिक पुराने मामलों में यदि संबंधित अभिलेख समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। साथ ही, सभी लंबित वादों की मासिक समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजना अनिवार्य किया गया है।
निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित हो
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इन प्रयासों से राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण होगा और आमजन को समय पर न्याय मिल सकेगा।