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जयपुर, (9 मार्च 2026)l राजस्थान की राजनीति का अगला बड़ा पड़ाव राज्यसभा चुनाव होने जा रहा है। 21 जून 2026 को प्रदेश से राज्यसभा के तीन दिग्गज सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। विधानसभा की 200 सीटों के वर्तमान समीकरणों के आधार पर भाजपा इन तीन में से दो सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित मान रही है, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की उम्मीद है। हालांकि, उम्मीदवारों के चयन को लेकर दोनों ही खेमों में भारी उठापटक और गुणा-भाग शुरू हो गया है।
इन दिग्गजों का कार्यकाल हो रहा है समाप्त
जून में रिटायर होने वाले चेहरों में दिल्ली से लेकर राजस्थान तक की राजनीति को प्रभावित करने वाले नाम शामिल हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू (भाजपा): उपचुनाव के जरिए राजस्थान से राज्यसभा पहुँचे केंद्रीय मंत्री बिट्टू का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। केंद्र में मंत्री होने के नाते उनके दोबारा नामांकन की प्रबल संभावना है।
राजेंद्र गहलोत (भाजपा): मारवाड़ के कद्दावर नेता और भाजपा के अनुभवी स्तंभ।
नीरज डांगी (कांग्रेस): कांग्रेस के दलित चेहरे के रूप में राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
विधानसभा का अंकगणित: भाजपा को बढ़त, कांग्रेस की राह कठिन
राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों के मौजूदा गणित के अनुसार, एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए लगभग 51 प्रथम वरीयता के मतों की आवश्यकता होती है।
भाजपा का समीकरण: भाजपा के पास 118 विधायक हैं। इस लिहाज से भाजपा 2 सीटें आसानी से जीत सकती है और उसके पास तीसरी सीट के लिए भी कुछ अतिरिक्त मत बचेंगे।
कांग्रेस का समीकरण: कांग्रेस के पास 67 विधायक हैं। कांग्रेस 1 सीट आसानी से निकाल सकती है, लेकिन वर्तमान हालात में दूसरी सीट के लिए निर्दलीयों का साथ मिलना चुनौतीपूर्ण होगा।
भाजपा की रणनीति: बिट्टू के साथ ‘जातीय’ संतुलन का तड़का
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रवनीत सिंह बिट्टू को पार्टी फिर से मौका दे सकती है। वहीं, दूसरी सीट के लिए भाजपा 2023 विधानसभा चुनाव में हार चुके लेकिन बड़े जनाधार वाले नेताओं पर दांव खेल सकती है।
राजेंद्र राठौड़: पूर्व नेता प्रतिपक्ष, जिनका शेखावाटी और राजपूत समाज में बड़ा प्रभाव है।
सतीश पूनिया: पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, जो जाट समुदाय और युवाओं के बीच खासी पकड़ रखते हैं। वहीं भाजपा खेमे का एक वर्ग पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के नाम का भी समर्थन कर रहा है। भाजपा इन नामों के जरिए आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए सोशल इंजीनियरिंग साधने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस की उलझन: अल्पसंख्यक चेहरे की मांग तेज
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार का अंतिम फैसला हाईकमान करेगा। हालांकि, पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारने का दबाव बना रहा है।
कारण: वर्तमान में राजस्थान के 35 सांसदों (25 लोकसभा और 10 राज्यसभा) में से एक भी अल्पसंख्यक समुदाय से नहीं है।
साख का सवाल: कांग्रेस अपने दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधे रखने के लिए किसी नए चेहरे को मौका दे सकती है।
राजस्थान के ‘राज्यसभा कोटे’ की जंग
भाजपा की कोशिश है कि वह राजस्थान की अधिकतम सीटों पर कब्जा कर उच्च सदन में एनडीए (NDA) की स्थिति और मजबूत करे। वहीं, कांग्रेस अपनी इकलौती सीट बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।