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कला और कलाकारों का सम्मान भारतीय संस्कृति की परम्परा- राज्यपाल

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय ने अरुण योगीराज को दी पीएचडी की मानद उपाधि

जयपुर, (15 अप्रैल 2025)। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि कला और कलाकारों का सम्मान भारतीय संस्कृति की परम्परा रही है। शिल्पी अरुण योगीराज को पीएचडी की पहली मानद उपाधि प्रदान कर महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय ने इस परंपरा का बेहतर निर्वहन किया है।

राज्यपाल ने मंगलवार को महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में अरुण योगीराज के मानद उपाधि सम्मान कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।

राज्यपाल ने कहा कि योगीराज इस उपाधि के लिए सर्वथा योग्य हैं। श्री योगीराज ने अत्यंत कम उम्र में शिल्प की गहरी साधना की है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में योगीराज द्वारा बनाई गई मूर्ति जीवंत है। उन्होंने योगीराज के कला कौशल्य की सराहना की और कहा कि हमारे देश में हजारों वर्षों से अच्छी मूर्तियां बनाने की परंपरा रही है। आज भी देश और प्रदेश में ऐसे कलाकार हैं, जिनकी कला को बेहतर पहचान मिली है।

राज्यपाल ने कहा कि योगीराज सिर्फ एक मूर्तिकार नहीं बल्कि भारतीय शिल्प कला की समृद्ध परंपरा के जीवंत प्रतीक हैं। श्री योगीराज ने मूर्तिकला की विरासत को अपनाया और इसे नई ऊंचाइयां दी।

राज्यपाल ने कहा कि योगीराज को दिए गए अभिनंदन पत्र को विश्वविद्यालय में भी प्रदर्शित किया जाए, जिससे युवा विद्यार्थियों को प्रेरणा मिले और वे भी इनका अनुसरण कर सकें।

मानद उपाधि प्राप्त करने के पश्चात अरुण योगीराज ने कहा कि यह भारत की समृद्ध कला परंपरा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि वह पांच पीढ़ियों से शिल्प की साधना कर रहे हैं।

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि योगीराज ने लोह पथ पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस, केदारनाथ में आदि शंकराचार्य, अमरनाथ में नंदी की प्रतिमा भी बनाई। उन्होंने कहा कि योगीराज ऐसे ऋषि हैं, जिन्होंने अपनी शिल्पकला के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत की संजीता और मूल्यों को विशेष पहचान दी है।

इससे पहले राज्यपाल ने अरुण योगीराज को पीएचडी की मानद उपाधि प्रदान की।

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