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JEE और NEET प्रवेश में 12वीं के अंकों को 50% वेटेज देने की सिफारिश, निसा ने किया स्वागत
शिक्षा तंत्र में बड़े बदलाव की तैयारी: निसा के सुझावों को विनीत जोशी समिति ने किया शामिल
झुंझुनूं (04 जुलाई 2026)। शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित विनीत जोशी की अध्यक्षता में ग्यारह सदस्य समिति की सिफारिशों का स्वागत करते हुए ‘नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस’ (NISA) ने इसे भारतीय शिक्षा प्रणाली के पुनरुद्धार की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया है। निसा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डॉ. दिलीप मोदी ने इस रिपोर्ट को केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को उसकी मूल भावना और गरिमा के साथ पुनर्स्थापित करने वाला एक परिवर्तनकारी खाका करार दिया है। उन्होंने इस सुधार प्रक्रिया में निसा की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख करते हुए जानकारी दी कि निसा का एक प्रतिनिधिमंडल 27 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्रालय में विनीत जोशी से मिला था। इस मुलाकात के दौरान निसा ने जो सिफारिशें समिति के समक्ष रखी थीं, उनमें से अधिकांश को स्वीकार किया गया है। निसा का स्पष्ट मानना है कि यदि इन सिफारिशों को प्रभावी और प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाता है, तो देश की स्कूली शिक्षा अधिक सशक्त, संतुलित और गुणवत्तापूर्ण बनेगी, जिससे विद्यार्थियों की कोचिंग संस्थानों पर घातक निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।
डॉ. दिलीप मोदी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा का स्वरूप अत्यधिक परीक्षा-केंद्रित हो गया है, जिसके कारण विद्यालयों की भूमिका कमजोर हुई है और एक अनियंत्रित ‘कोचिंग संस्कृति’ का विस्तार हुआ है। इसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, उनकी जन्मजात रचनात्मकता और समग्र विकास पर पड़ा है। डॉ. मोदी ने जोर दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना या केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होना नहीं है, बल्कि ऐसे जागरूक, संवेदनशील, तार्किक और नवाचारी नागरिक तैयार करना है जो राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। निसा का मानना है कि विद्यालय केवल पाठ्य पुस्तकों का ज्ञान देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि वे चरित्र निर्माण, नेतृत्व विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व के केंद्र हैं। एक सशक्त विद्यालय व्यवस्था ही भारत को ज्ञान-आधारित वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर कर सकती है।
शिक्षा प्रणाली को छात्र-हितैषी बनाने हेतु निसा ने भारत सरकार और विनीत जोशी समिति के समक्ष व्यापक और व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए हैं, जिन्हें एकीकृत करना अनिवार्य है। निसा ने प्रस्ताव दिया है कि 12वीं बोर्ड की परीक्षाओं की सर्वोच्चता को पुनः स्थापित किया जाए और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए बोर्ड मेरिट को प्राथमिक आधार बनाया जाए। इसके साथ ही, नीट और जेईई जैसी केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षाओं के स्थान पर चरणबद्ध तरीके से बोर्ड अंकों के आधार पर ‘मेरिट-लिंक्ड’ प्रवेश प्रणाली लागू की जानी चाहिए। निसा ने कोचिंग उद्योग को ‘शिक्षा’ के बजाय ‘व्यावसायिक सेवा’ के रूप में वर्गीकृत करने, तार्किक शुल्क नियंत्रण लागू करने और भ्रामक विज्ञापनों पर दंड का प्रावधान करने की मांग की है। डमी स्कूलों और फर्जी उपस्थिति के गठजोड़ को ‘संज्ञेय अपराध’ घोषित करना भी उनके प्रमुख सुझावों में शामिल है।
निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा, सचिव तुलसी प्रसाद और वाइस प्रेसीडेंट सुशील गुप्ता ने भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय तथा नीति-निर्माताओं से आग्रह किया है कि समिति की सिफारिशों को त्वरित गति से लागू किया जाए और उन्हें आवश्यक नीतिगत एवं कानूनी समर्थन प्रदान किया जाए। निसा का मानना है कि इन सुधारों से देश के करोड़ों विद्यार्थियों और अभिभावकों को कोचिंग के भारी-भरकम आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी। अंत में, निसा ने एक ‘राष्ट्रीय परीक्षा सुधार आयोग’ के गठन का भी प्रस्ताव रखा है, जिसमें सभी हितधारकों का प्रतिनिधित्व हो ताकि धरातल की वास्तविकताओं को समझ कर सुधारों को जमीन पर उतारा जा सके। जब विद्यालय मजबूत होंगे, तभी विद्यार्थी सशक्त होंगे और जब विद्यार्थी सशक्त होंगे, तभी भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने विनीत जोशी की अध्यक्षता में ग्यारह सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसका उद्देश्य कोचिंग कक्षा पर निर्भरता कम करने, स्कूल एजुकेशन को सशक्त बनाने और डमी स्कूल पर नियंत्रण करने के लिए सिफारिशें देना था। इस क्रांतिकारी कदम के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, डॉ. दिलीप मोदी ने शिक्षा सुधार की दिशा में इस महत्वपूर्ण पहल के लिए उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और उनकी 11-सदस्यीय समिति के समस्त सदस्यों को एक औपचारिक धन्यवाद पत्र लिखकर आभार व्यक्त किया है।