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राजीविका द्वारा इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान परिसर में सुमंगल–दीपावली मेले का आयोजन

पारंपरिक शिल्प, परिधान, उपहार हैम्पर्स और स्थानीय व्यंजनों का संगम बना आकर्षण का केंद्र

जयपुर, (11 अक्टूबर 2025)। ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका), ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित सुमंगल–दीपावली मेला 2025 में इस वर्ष राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए पारंपरिक उत्पाद, शिल्प, परिधान, त्योहारी उपहार और खाद्य सामग्री विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। 1 से 12 अक्टूबर तक आयोजित इस मेले में राजीविका के स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिला सदस्य 70 से अधिक स्टॉलों पर अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय कर रही हैं।

मेले में पर्यावरण अनुकूल एवं सतत उत्पादों की समृद्ध विविधता प्रदर्शित की जा रही है। गोबर से निर्मित फूलदान, दीये, वॉल हैंगिंग, राधा–कृष्ण पेंटिंग जैसी कलाकृतियाँ, अपशिष्ट कपड़ों से बनाए गए सॉफ्ट टॉयज़ एवं की–चेन, जूट से बने टिफिन बैग, बॉटल बैग व फोल्डर आगंतुकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। ये उत्पाद ग्रामीण नवाचार एवं पर्यावरण संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

राजस्थान की समृद्ध वस्त्र एवं परिधान परंपरा भी मेले का मुख्य आकर्षण है। कॉटन से बने राजपूती सेट, एप्लिक (कटवर्क) सूट, बांधणी और अज्रक प्रिंट के सूट-दुपट्टे, राजपूती पोशाकें, ऊन से बने शॉल व जैकेट, पारंपरिक पट्‌टू और बर्दी शॉल, बच्चों के परिधान, संगानेरी व बगरू प्रिंट जैसे वस्त्र न केवल परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमिता की सशक्त झलक भी दिखा रहे हैं।

मेले में ब्लू पॉटरी, टेराकोटा और ब्लैक पॉटरी जैसे पारंपरिक मिट्टी शिल्प भी विशेष रूप से प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इनमें फ्लॉवर पॉट्स, वासेज़, दिया स्टैंड, गणेश वॉल हैंगिंग, फाउंटेन, हांडी, कॉफी–टी कप, टेप मटका और बोतलें जैसी वस्तुएँ शामिल हैं, जो राजस्थान की लोककला और शिल्पकला की विविधता को एक मंच पर प्रस्तुत करती हैं।

इस वर्ष मेले में त्योहारी उपहार हैम्पर्स भी प्रमुख आकर्षण हैं, जिन्हें स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों द्वारा तैयार किया गया है। ₹650 से ₹3000 की मूल्य श्रेणी में उपलब्ध ये हैम्पर्स पारंपरिक कला, आधुनिक साज–सज्जा और ग्रामीण सृजनशीलता का अनूठा संगम हैं, जो कॉर्पोरेट व त्योहारी गिफ्टिंग के लिए एक प्रभावी विकल्प बन रहे हैं।

पारंपरिक लोक कला एवं चित्रकला जैसे मंडला, मंडना, बनी ठनी, पिचवाई और हैंड पेंटिंग की प्रदर्शनी भी मेले में विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जो ग्रामीण महिला कलाकारों की सूक्ष्म कलात्मकता और रचनात्मकता को दर्शाती है।

स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजनों से सजा फूड कोर्ट आगंतुकों को ग्रामीण स्वाद का अनूठा अनुभव प्रदान कर रहा है। मेले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आगंतुक पहुँच रहे हैं और ग्रामीण उत्पादों के प्रति गहरी रुचि एवं उत्साह प्रदर्शित कर रहे हैं।

सुमंगल–दीपावली मेला 2025 12 अक्टूबर तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, जयपुर में आयोजित किया जा रहा है।

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