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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह आयोजित
दीक्षांत नव जीवन की शुरुआत, आयुर्वेद समग्र जीवन विज्ञान — राज्यपाल बागडे
जयपुर, (20 मार्च 2026)। राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि दीक्षांत केवल उपाधि प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के नव जीवन की शुरुआत का महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि यह वह समय होता है जब विद्यार्थी अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के उत्थान में उपयोग करने के लिए तैयार होते हैं।
राज्यपाल बागडे शुक्रवार को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीक्षांत आत्मावलोकन का भी अवसर है, जहां विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल को व्यवहार में उतारने के लिए संकल्पित होते हैं।
उन्होंने आयुर्वेद की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘आयु’ अर्थात जीवन और ‘वेद’ अर्थात विज्ञान, यानी आयुर्वेद जीवन का विज्ञान है। यह पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—तथा वात, पित्त और कफ के संतुलन पर आधारित समग्र स्वास्थ्य प्रणाली है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के संतुलन के माध्यम से सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करने वाला जीवन दर्शन है।
राज्यपाल ने कहा कि वेदों और प्राचीन ग्रंथों में चिकित्सा विज्ञान के समृद्ध संदर्भ मिलते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में आयुर्वेद का विशेष स्थान रहा है, जो आज भी जीवनशैली जनित रोगों के समाधान में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझती दुनिया के लिए आयुर्वेद मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सेवा भाव को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाएं और ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के सिद्धांत को अपनाते हुए समाज के स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान दें। उन्होंने कहा कि चिकित्सक केवल रोगों का उपचार नहीं करता, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवनशैली का मार्ग भी दिखाता है।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे शिक्षण, अनुसंधान एवं सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रमाण आधारित अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक स्तर पर आयुष पद्धतियों के प्रसार पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न महाविद्यालयों, अनुसंधान कार्यों, ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा शिविरों, स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए समझौतों की सराहना की। साथ ही “धन्वन्तरि वनौषधि उद्यान” के विकास को भी उल्लेखनीय पहल बताया।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे आयुर्वेद के ज्ञान को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विकसित कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।इस अवसर पर राज्यपाल के कर कमलों से विश्वविद्यालय की ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्री का लोकार्पण किया गया।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण का उत्सव है। उन्होंने कहा कि आज का समय ऐसा है जब पूरा विश्व भारत के ज्ञान, विज्ञान और जीवन-दर्शन की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवारजनों का त्याग और परिश्रम निहित है।
उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और शाश्वत ज्ञान परंपरा का हिस्सा है, जो जीवन को सार्थकता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों को व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बन रहा है।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य का सशक्त माध्यम है। यह तन, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि राजस्थान आयुष हब के रूप में उभर रहा है और जोधपुर इस दिशा में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। राज्य सरकार प्रदेश को हेल्थ डेस्टिनेशन बनाने के लिए कृतसंकल्पित है।
समारोह में 16 विद्यार्थियों को आयुर्वेद में पीएचडी, 133 को आयुर्वेद तथा 12 को होम्योपैथी में एमडी/एमएस, तथा कुल 1230 विद्यार्थियों को स्नातक उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में कुल 6 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।