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भरतपुर,(22 अक्टूबर 2024)। मंगलवार को तंबाकू मुक्त यूथ कैपेन 2.0 के अंतर्गत संभाग स्तर की कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला
एसआरकेपीएस संस्था झुंझुनू के सहयोग द्वारा कराई गई।
जिसकी अध्यक्षता संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जोन भरतपुर डॉ. गौरव कपूर द्वारा की गई एवं मुख्य अतिथि के रूप में सीईओ जिला परिषद करौली महेश चंद शर्मा एवं महानिरीक्षक पुलिस ओम प्रकाश शर्मा मौजूद रहे।
निदेशालय स्तर से कार्यशाला में राज्य सलाहकार नरेंद्र सिंह एवं एसआरकेपीएस के डायरेक्टर राजन चौधरी मौजूद रहे।
कार्यशाला में संभाग के जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, जिला औषधि नियंत्रक अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, सीओ जिला परिषद् व तंबाकू प्रकोष्ठ के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए संयुक्त निदेशक डॉ कपूर ने सभी को बताया कि तंबाकू के सेवन से कई बीमारियां होती हैं। तंबाकू खाने के कई गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। कुछ मुख्य दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं
कैंसर का खतरा तंबाकू में कैंसरजनक तत्व होते हैं जो मुंह गले और पेट के कैंसर का कारण बन सकते हैं। खासकर मुंह का कैंसर तंबाकू चबाने वालों में आम है।
दांतों और मसूड़ों की समस्याएं तंबाकू खाने से दांत पीले हो जाते हैं मसूड़ों में सूजन खून आना और दांतों का गिरना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
पाचन तंत्र पर असर तंबाकू चबाने से पेट की समस्याएं जैसे गैस्ट्रिक अल्सर और एसिडिटी बढ़ सकती है।
दिल की बीमारियां तंबाकू का सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है और इससे दिल के दौरे या अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
श्वास संबंधी समस्याएं तंबाकू खाने से सांस लेने में दिक्कत दमा और फेफड़ों की अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
अन्य समस्याएं इसके अतिरिक्त तंबाकू चबाने से त्वचा की समस्याएं स्वाद और गंध की क्षमता में कमी और इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है।
तंबाकू का सेवन छोड़ना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है और इससे इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसी क्रम में महान निरीक्षक पुलिस ओम प्रकाश शर्मा जी ने सभी को संबोधित करते हुए तंबाकू से जुड़े कई दुष्प्रभाव एवं आर्थिक एवं सामाजिक स्तर पर होने वाले नुकसान के बारे में बताया उन्होंने कहा कि तंबाकू के साथ साथ एवं कई तरीके के नशे आजकल की युवा पीढ़ी द्वारा किए जा रहे हैं जिन्हें रोकने के लिए पुलिस महकमा हमेशा से प्रयासरत रहा है उन्होंने बताया कि कोटपा अधिनियम के तहत पुलिस के द्वारा चालान की कार्रवाई की जाती है एवं ऐसी नशे का व्यापार करने वाली अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को रोका जाता है
सीईओ जिला परिषद करौली ने संबोधित करते हुए बताया कि युवाओं में नशे की लत बढ़ती जा रही इस का कारण सामाजिक दबाव दोस्तों के साथ घुलने मिलने या स्कूल में दिखने के प्रयास में कई युवा तम्बाकू का सेवन शुरू कर देते हैं।
तनाव और चिंता आजकल की व्यस्त जीवनशैली और पढ़ाई या करियर से जुड़े दबाव के कारण युवा तनाव का सामना करते हैं और इसे कम करने के लिए तम्बाकू का सहारा लेते हैं।
विज्ञापन और फिल्मों का प्रभाव मीडिया और फिल्मों में तम्बाकू के ग्लैमराइजेशन के कारण युवा इसके आकर्षण में आ सकते हैं।
परिवार का प्रभाव अगर परिवार के सदस्य तम्बाकू का सेवन करते हैं तो इसका प्रभाव बच्चों और युवाओं पर भी पड़ सकता है।
जानकारी की कमी कई युवा यह नहीं समझते कि तम्बाकू का सेवन किस हद तक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है जैसे कि कैंसर हृदय रोग और श्वसन संबंधी समस्याएं।
तम्बाकू की लत से बचने के लिए जागरूकता फैलाना और सही समय पर हस्तक्षेप करना जरूरी है। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम और काउंसलिंग सेवाएं भी मददगार साबित हो सकती हैं।
इसी प्रकार निदेशालय स्तर से आए राज्य सलाहकार नरेंद्र सिंह सिंह द्वारा तंबाकू मुक्त यूथ कैंपियन 2.0 के बारे में विस्तार पूर्वक बताया एवं उन्होंने बताया कि इसके प्रचार प्रसार हेतु समाचार पत्र आदि में जागरूकता के साथ साथ सोशल मीडिया के अंतर्गत भी तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव का प्रचार प्रसार किया जा रहा है उन्होंने संभाग स्तर पर सातों जिलों के अब तक तंबाकू मुक्त कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की।
इसी के साथ एसआरकेपीएस संस्था के राजन चौधरी द्वारा तंबाकू मुक्त ग्राम पंचायत एवं तंबाकू उत्पाद बेचने हेतु वेंडर लाइसेंस के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। इस मौके पर जिला तम्बाकू प्रकोष्ठ भरतपुर से डीपीओ नीरजा कुंतल, डीपीसी पुरूषोत्तम शर्मा, आईईसी समन्वयक राममहोन जाॅगिड, डीईओ हिमांशु आदि ने संभाग स्तरीय कार्यशाला में अपना सहयोग प्रदान किया।