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संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर किसान एवं जनवादी संगठनों की ओर से जिला कलेक्टर झुंझुनूं के सामने विरोध प्रदर्शन
झुंझुनूं, (9 अगस्त 2023)।अंग्रेजों भारत छोड़ो व विश्व आदिवासी दिवस पर संयुक्त किसान आंदोलन के राष्ट्रीय आह्वान पर मोर्चा के घटक संगठन क्रान्तिकारी किसान यूनियन एवं जनवादी संगठनों की ओर से ” कारपोरेट लुटेरों भारत छोड़ो, खेती छोड़ो” कार्यक्रम के तहत जिला कलेक्टर झुंझुनूं के सामने विरोध सभा कर प्रदर्शन किया गया तथा राष्ट्रपति महोदया को जिला कलेक्टर झुंझुनूं के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं जिसके कारण किसान मजदूर बर्बाद हो रहा है तथा कारपोरेट घरानों को खेती किसानी सौंपी जा रही है जिससे वे मालामाल हो रहे हैं। केन्द्र की भाजपा सरकार ने तीन काले कानून वापस लेने के समय किसानों के साथ लिखित में समझौता किया गया था लेकिन आज तक उस समझौते को लागू नहीं किया गया है। समझौते में एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी, शहीद किसानों को मुआवजा, आन्दोलन के दौरान किसानों पर बनाए गए मुकदमे वापस लेना, केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री टेनी की बर्खास्तगी, आदि कोई भी मांग पूरी नहीं की गई। इसके अलावा किसानों का सम्पूर्ण कर्ज माफ हो, तथा 10,000 रू पेंशन दी जाए। सभा स्थल से मणिपुर एवं हरियाणा के नूंह में साम्प्रदायिक हिंसा की निंदा करते हुए भाजपा आरएसएस की सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया। सरकार चुनावी फायदा उठाने को ध्यान में रखकर साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने का काम कर रही है, जिसमें वे कभी भी कामयाब नही हो सकेंगे। साम्प्रदायिकता फैलाने वाले तत्वों का कड़ा विरोध करते हैं तथा कठोर कार्रवाई करने की मांग करते हैं। इस अवसर पर कारपोरेट भगाओ, किसान बचाओ, इंकलाब जिंदाबाद, किसान मजदूर एकता जिंदाबाद, साम्प्रदायिकता मुर्दाबाद, हिन्दू मुस्लिम भाई भाई के नारे लगाए गए। वक्ताओं में क्रान्तिकारी किसान यूनियन के संयोजक पोकरसिह झाझडिया, सर्वहारा एकता मंच के संयोजक बजरंग लाल एडवोकेट, मजदूर यूनियन के नेता महेश चोमाल, किसान नेता महताब सिंह चौधरी एवं पाल सिंह खीचड़, सहदेव कस्वा, खुर्शीद हुसैन गौहर, युनूस अली भाटी, विक्रम दुलड एडवोकेट, अशोक मांजू, बलबीरसिंह झाझडिया, कै मोहनलाल, भंवरलाल महरिया, रामेश्वर बास नानग, प्रमुख थे। इसके अलावा श्रीचंद कालेर, केशरदेव कालेर, भागीरथ कपूरिया, प्यारेलाल झाझडिया, सज्जन कुमार, लक्ष्मीनारायण, धर्मपाल सिंह डारा, अलीहसन, रामनिवास बेनीवाल, दयानंद जानू, रायसिंह तोगडा कलां, राजेश जानू, रामदेव गढ़वाल, लीलाधर, महेंद्र बाबल, धर्मपाल सिंह खेदड़, चौ राजेन्द्र डूमरा, ओंकारमल कुलहरी, करणीराम मझाऊ, प्रहलाद सिंह, बनवारीलाल जाट, छैलूराम जाट, त्रिलोक सिंह, पितराम कालेर, हरिराम मुंशी, बीरबल सिंह खरबास के अलावा बड़ी संख्या में किसान मजदूर उपस्थित थे।