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जयपुर, (3 फरवरी 2026)। देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार प्रदेशभर में मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं विकास कार्यों के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा चुनावी वर्ष में विभिन्न विकास कार्यों की केवल घोषणाएं की गई थीं। विभागीय समीक्षा के दौरान इनमें से कई कार्यों के व्यावहारिक नहीं पाए जाने के कारण उन्हें क्रियान्वित करना संभव नहीं था।
देवस्थान मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक चेतन पटेल कोलाना द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि बजट 2023-24 में ढीपरी चम्बल (खातौली)-कोटा स्थित ठाकुर जी गोपालजी महाराज मंदिर, पीपल्दा समेल (सुल्तानपुर)-कोटा स्थित प्राचीन शिव मंदिर तथा ककरावदा (ईटावा) कोटा स्थित प्राचीन श्री चमलेश्वर महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार एवं विकास कार्य करवाये जाने की घोषणा की गयी थी। इस घोषणा की क्रियान्विति के क्रम में पर्यटन विकास कोष से ठाकुर जी गोपालजी मंदिर ढीपरी (चम्बल)-कोटा में विकास कार्य हेतु 383.33 लाख रुपए तथा प्राचीन शिव मंदिर, पीपल्दा समेल (सुल्तानपुर) हेतु 248.14 लाख रुपए की स्वीकृति 13 जून 2023 को जारी की गई। चमलेश्वर महादेव मंदिर ककरावदा इटावा हेतु कोई स्वीकृति जारी नहीं की गयी।
कुमावत ने बताया कि राजस्थान विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के कारण कार्यों की निविदा जारी नहीं हो पाई। विधानसभा चुनाव के बाद वित्त विभाग की अशासकीय टीप 22 दिसंबर 2023 के अनुसरण में यह कार्य क्रियान्वित नहीं किये जा सके।
इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि कोटा जिले में 24 धार्मिक स्थल देवस्थान विभाग द्वारा प्रबंधित और नियंत्रित है, जिनका विधानसभा वार विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र पीपल्दा में प्राचीन धार्मिक स्थल अराजकीय हैं। अराजकीय मंदिरों को देवस्थान विभाग के अधीन सम्मिलित करने का वर्तमान में कोई प्रावधान नहीं है। देवस्थान मंत्री ने बताया कि राजस्थान टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेसिटी बिल्डिंग फण्ड में ऋण लिया जाना प्रक्रियाधीन है। इसके बाद इन कार्यं के संबंध में अग्रिम निर्णय लिया जाएगा।