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वरिष्ठ पत्रकार माणक मोट मणि नहीं रहे, तमाम लोगों की ओर से संवदेना व्यक्त

झुंझुनूं, (10 अप्रैेल 2025)। प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्रों में लंबे समय तक सेवाए देने वाले वरिष्ठ एवं राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार माणक मोट मणि गुरूवार को इस दुनिया से विदा हो गए। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। गुरूवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली और अपने साथियों को अलविदा कहे गए।

इधर वरिष्ठ पत्रकार माणक मोट मणि के निधन पर अमेरिका में प्रो रहे झुंझुनूं निवासी वयोवृद्ध प्रसिद्ध गणितज्ञ डा. घासीराम वर्मा, राजस्थान मदरसा बोर्ड के चैयरमेन एम डी चौपदार, कर्मस्थली में उनके साथी रहे पूर्व जनसंर्पक अधिकारी सवाईसिंह मालावत,पीआरओ हिमाशुसिंह, झुंझुनूं जिला पत्रकार समिति अध्यक्ष अमित भारद्वाज, वरिष्ठ पत्रकार महेन्द्र मंयद, विभिन्न शिक्षण संस्थाओं से जुड़े विजय गोपाल मोटासरा सहित शिक्षा, साहित्य, जनसंर्पक कर्मियों, अधिकारियों, कार्मिकों , पत्रकारिता और उनसे जुड़े लोगों ने संवदेना व्यक्त करते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। तमाम लोगों ने उनकी पत्नी और एकमात्र पुत्र पीयुष को यह दुख सहन करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

बताते चले कि पिछले कुछ से अस्वस्थ चल रहे पत्रकार माणक मोट पिछले पांच माह से बीमार थे और उनका उपचार जोधपुर के एम्स अस्पताल में चल रहा था। गुरुवार दोपहर बाद जोधपुर में ही उनका अन्तिम संस्कार किया गया। 65 वर्षीय माणक मोट 25 साल पहले राजस्थान पत्रिका झुंझुनूं में बतौर प्रभारी के रुप में आए थे। इसके बाद दैनिक भास्कर में भी बतौर प्रभारी के रुप में ही उन्होंने लंबे समय तक झुंझुनूं में सेवाएं दी और यही से चार साल पहले सेवानिवृत हुए थे। उन्होंने डेढ दर्जन पुस्तकों का लेखन किया और अभी चार पुस्तकें प्रकाशनाधीन है।

11 जनवरी 1960 को चूरू में जन्मे माणक मोट मणि ने ने अपनी शिक्षा जोधपुर में बीकाम और एमए हिन्दी में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, जागरण,, जलते दीप, तरुण राजस्थान, जागरूक टाइम्स जैसे समाचार पत्रों में अपनी सेवाए दबंग पत्रकार के रूप में दी है। उन्होंने काव्य रचना के साथ व्यक्ति विशेष पर भी अनेक पुस्तकें लिखी है। माणक मोट मणि ने लेखक के रुप में महिला शिक्षा के उत्थान के लिए जिंदगी समर्पित करने वाले अमेरिका प्रवासी एवं प्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ. घासीराम वर्मा और उनकी धर्मपत्नी रुकमणि पर मेरे जीवन की पारसमणि भी लिखी थी। इस दौरान माणक मोट मणि विभिन्न संगठनों की ओर से सम्मान किया गया था।

झुंझुनू को अपनी कर्मस्थली बनाने वाले पत्रकार, साहित्यकार, कवि और लेखक के रुप में अपनी अलग छाप छोडऩे वाले अधिस्वीकृत पत्रकार माणक मोट मणि, अपने सभी साथियों में हसमुख और जिंदा दिल के इंसान के रुप में पहचान रखते है। उनकी भाषा एवं व्यग्ंय शैली पर अच्छी पकड़ थी। पत्रकारिता के दौरान उन्होंने कई खतरों के सच को बैखौफ होकर उजागर किया था लेकिन कभी लेखनी से पथ विमुख नहीं हुए। चूरू में जन्मे और जोधपुर में पढ़े बढ़े माणक मोट मणि ने गत छह मार्च को झुंझुनूं में बनाए गए नए मकान में गृह प्रवेश भी किया था। उनके निधन पर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से संवदेना जताई जा रही हैं।

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