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कृषि विश्वविद्यालय, कोटा का नवम् दीक्षांत समारोह आयोजित
किसानों को उन्नत बीज एवं तकनीक का ज्ञान देकर आत्मनिर्भर बनाएं - राज्यपाल
जयपुर, (13 मई 2026)। राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि कृषि आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। देश की अधिकांश जनसंख्या की आजीविका आज भी कृषि और पशुपालन पर आधारित है। ऐसे में कृषि शिक्षा का महत्व काफी अधिक है। इससे ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन एवं विकसित भारत के दृष्टिकोण को सहज प्राप्त किया जा सकता है। कृषि शिक्षा के माध्यम से खेतों में उत्पादकता बढ़ाकर खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने के साथ ही किसानों को उन्नत बीज, तकनीक एवं विपणन का ज्ञान देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
राज्यपाल बागडे बुधवार को राज्य कृषि प्रबंध संस्थान (सिआम) ऑडिटोरियम में कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के नवम् दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीक्षांत समारोह में पदक एवं डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से प्राप्त शिक्षा, ज्ञान एवं अनुसंधान का उपयोग विकसित भारत के लिए करें। उन्होंने कहा कि हमारे कृषि विश्वविद्यालय आधुनिक ज्ञान, विज्ञान, नवीनतम तकनीकों एवं व्यावहारिक समाधानों के सशक्त केन्द्र के रूप में विकसित हो जहां किसानों को सरल, सुलभ और वैज्ञानिक जानकारी मिल सके। उन्हें कृषि क्षेत्र में नवाचारों का उपयोग करते हुए फसल उत्पादन बढ़ाने के बारे में मदद मिले।
बागडे ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना विकसित कृषि के बिना अधूरी है। कृषि क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाईल एप्लीकेशन, ड्रोन तकनीक, एआई और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कृषि संकाय के छात्रों का आह्वान किया कि कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग, जैविक खेती, मूल्य संवर्धन और सप्लाई चेन प्रबंधन जैसे अनेक नए अवसर उपलब्ध हैं। इन अवसरों का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करें। उन्होंने कहा कि युवा नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि देने वाले बनें।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाईयों पर निर्मित भवनों का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया। इसमें कृषि पीएम-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत अनुसंधान केन्द्र कोटा की खरपतवार नियंत्रण प्रयोगशाला, यांत्रिक कृषि फार्म की बीज प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला का शिलान्यास तथा कृषि अनुसंधान केन्द्र कोटा के बीज विधायन संयंत्र एवं कृषि महाविद्यालय उम्मेदगंज कोटा के अकादमिक भवन का लोकार्पण शामिल है। साथ ही, कैनोपी मेनेजमेंट ऑफ फ्रूटक्रॉप तथा सोयाबीन के जादुई फायदे-एक बीज कई व्यंजन पुस्तकों का विमोचन राज्यपाल एवं अन्य अतिथियों ने किया।
दीक्षांत समारोह में कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि विश्वविद्यालय की डिग्री प्राप्त करने के बाद एक नई यात्रा की शुरुआत होती है और भविष्य की नई संभावनाओं के द्वारा खुलते हैं। उन्होंने कहा कि जो ज्ञान अर्जित किया है उसका उपयोग किसानों, समाज और राष्ट्र हित में करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 55 से 60 प्रतिशत भाग कृषि योग्य है लेकिन इसमें से 35 से 40 प्रतिशत क्षेत्र ही सिंचित है।
समारोह में राज्यपाल ने कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी संकायों में कुल 358 अभ्यर्थियों को उपाधियां प्रदान की। दीक्षांत समारोह में कुल 14 स्वर्ण पदक, जिनमें से 3 स्वर्ण पदक स्नातक अभ्यर्थियों को तथा 6 स्वर्ण पदक स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों को प्रदान किए गए। इन स्वर्ण पदकों में से एक कुलगुरु स्वर्ण पदक तथा एक कुलाधिपति स्वर्ण पदक दिया जाना भी सम्मिलित है।