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नूआं में न्याय की चौपाल: तहसीलदार डॉ. सुरेन्द्र भास्कर के नेतृत्व में ‘ग्रामीण सेवा शिविर’ ने मिटाया पीढ़ियों का मनमुटाव, दो बड़े संयुक्त खातों का हुआ ऐतिहासिक विभाजन

 झुंझुनू (13 जुलाई 2026)।पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत नूआं में आयोजित ‘ग्रामीण सेवा शिविर’ सुशासन, त्वरित न्याय और संवेदनशील प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। उपखंड अधिकारी विश्वामित्र मीणा की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर में तहसीलदार डॉ. सुरेन्द्र भास्कर ने निर्णायक एवं नेतृत्वकारी भूमिका निभाते हुए वर्षों से लंबित दो जटिल संयुक्त खातेदारी प्रकरणों का आपसी सहमति से मौके पर ही समाधान करवाया। विकास अधिकारी अमित चौधरी के समन्वय तथा ग्राम पंचायत प्रशासक नाहिदा बानो की उपस्थिति में आयोजित इस शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

ग्राम पंचायत नूआं के ये दोनों बड़े संयुक्त खातेदारी प्रकरण वर्षों से लंबित थे। विभाजन नहीं होने के कारण काश्तकार अपनी भूमि का स्वतंत्र उपयोग नहीं कर पा रहे थे और न ही बैंक ऋण सहित अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ ले पा रहे थे। लंबे समय से चले आ रहे इन विवादों ने परिवारों के बीच दूरियां भी बढ़ा दी थीं।

तहसीलदार डॉ. सुरेन्द्र भास्कर ने दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक सुना, राजस्व नियमों की स्पष्ट जानकारी दी तथा संवाद और आपसी विश्वास का वातावरण तैयार कर सभी पक्षों को सहमति के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रशासनिक दक्षता, निष्पक्ष कार्यशैली और त्वरित निर्णय क्षमता के परिणामस्वरूप वर्षों पुराना विवाद कुछ ही घंटों में सुलझ गया।

दोनों पक्षों की सहमति प्राप्त होने के बाद डॉ. सुरेन्द्र भास्कर की स्वीकृति एवं मार्गदर्शन में भूमि का विधिसम्मत विभाजन मौके पर ही कर दिया गया। प्रथम प्रकरण में स्वर्गीय भागीरथ सिंह के उत्तराधिकारियों—किशन सिंह, दौलत सिंह, नत्थू सिंह एवं बिष्णु सिंह के मध्य भूमि का न्यायसंगत विभाजन कर पृथक मालिकाना अधिकार निर्धारित किए गए। वहीं द्वितीय प्रकरण में स्वर्गीय शिवकरण के उत्तराधिकारियों (ओमप्रकाश, विद्याधर, प्रमोद कुमारी) तथा स्वर्गीय प्रताप सिंह के उत्तराधिकारियों (बनवारीलाल, मुकेश, मोहनलाल, विनोद कुमार, सुमित्रा देवी एवं मुन्नी देवी) के मध्य वैधानिक रूप से भूमि का विभाजन कर प्रत्येक खातेदार का हिस्सा एवं सीमाएं निर्धारित की गईं।

इस त्वरित एवं पारदर्शी कार्रवाई से लाभान्वित किसानों के चेहरों पर वर्षों बाद संतोष और खुशी दिखाई दी। उपस्थित ग्रामीणों ने भी तहसीलदार डॉ. सुरेन्द्र भास्कर की संवेदनशील कार्यशैली, निष्पक्ष निर्णय क्षमता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। यह शिविर इस बात का उदाहरण बन गया कि सक्षम नेतृत्व, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और आपसी सद्भाव के माध्यम से वर्षों पुराने राजस्व विवादों का भी प्रभावी एवं स्थायी समाधान संभव है।

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