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पांच विधानसभा उप चुनावों में भाजपा की राह कठीन लेकिन कांग्रेस की राह भी आसान नही

जयपुर,(राजन चौधरी)। राजस्थान में लोकसभा चुनाव के बाद पांच विधानसभा सीट रिक्त हुई क्योकि यहां से चुने विधायक सांसद चुने गए है। केन्द्र व राज्य में भाजपा की सरकार है वो चाहेगे की सरकार के सहयोग के चलते आमजन को प्रभावित कर सीट जी​ती जाऐं लेकिन जिस तरह श्रीकरणपुर सीट से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की मृत्यु के कारण चुनाव स्थगित हुए और भाजपा सरकार बनने के बाद जब चुनाव हुए तो भाजपा ने प्रत्याशी को मंत्री बना कर मैदान में उतारने के बाद भी करारी हार का सामना करना पड़ा। वैसे ही पांच उप चुनावों में भी भाजपा की राह बहुत कठीन है लेकिन कांग्रेस की राह भी आसान नही है।

भाजपा व कांग्रेस सहित रालोपा व बाप ने भी चुनावी मैदान में प्रत्याशी उतारने की रणनीति बनाना प्रारम्भ कर दिया है। भाजपा व कांग्रेस ने तो चयन सलेक्शन कमेंटी भी ​गठित कर दी है। चौरासी विधानसभा सीट राजकुमार रोत के सांसद बनने से खाली हुई है वहां बाप का दबदबा कायम रहने की सम्भावना है। हालांकि कांग्रेस ने चुनाव हेतु कमेंटी का गठन किया है जिसमें उपाध्यक्ष रतन देवासी, जिलाध्यक्ष बल्लभ राम पाटीदार, विधायक पुष्करलाल डांगी व पूर्व विधायक रामलाल मीणा को शामिल किया है। वही भाजपा ने मंत्री बाबुलाल खराड़ी, विधायक श्रीचंद कृपलानी, उपाध्यक्ष नाहरसिंह जोधा, प्रदेश मंत्री मिथलेष गौतम व महेश शर्मा को प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी दी गई है।

खींवसर विधानसभा रालोपा के मुख्य हनुमान बेनीवाल के सांसद बनने पर खाली हुई है। बे​नीवाल अबकी बार अपनी पत्नी को चुनाव लड़ा सकते है ऐसा आंकलन किया जा रहा है। लेकिन बेनीवाल का राजनीतिक वर्चस्व लगातार घट रहा है। गत विधानसभा में तीन विधायक थे जबकि इस बार सिर्फ खुद एक सीट ही निकाल पाये | ऐसी स्थिति में बेनीवाल को कांग्रेस समर्थन नही देगी तो रालोपा का जीत पाना बहुत भी मुश्किल हो सकता है। खींवसर सीट पर कांग्रेस, भाजपा व रालोपा में त्रिको​णीय संघर्ष रहा तो भाजपा को फायदा हो सकता है। खींवसर से कांग्रेस प्रत्याशी तय करने हेतु कांग्रेस ने कमेटी का गठन किया जिसमें जिलाध्यक्ष जाकिर हुसैन गैसावत, विधायक डुंंगरराम गेदर, सेवादल के मुख्य संगठक हेमसिंह शेखावत व एनएसयूआई के अभिषेक चौधरी को शामिल किया है। वही भाजपा की कमेटी में मंत्री कन्हैयालाल चौधरी,मंत्री सुरेश रावत, विधायक बाबुसिंह राठौड़, उपाध्यक्ष नारायण पंचारिया व अशोक सैनी को प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी दी है।

देवली—उनियारा विधानसभा क्षेत्र से ​हरिश मीणा के सांसद बनने से रिक्त हुआ विधानसभा क्षेत्र है। सांसद हरिश मीणा व पूर्व उपमुख्य मंत्री सचिन पायलट का क्षेत्र में मीणा व गुर्जर का साथ लेकर जीतना मुख्य फार्मुला रहा है। ऐसी स्थिति में यह सीट भाजपा के लिए जीत पाना बहुत ही कठिन होगा। इस सीट पर कांग्रेस पुन: प्रभावी रहकर जीत सकती है। कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन हेतु कमेटी में सांसद हरिश मीणा, म​हासचिव प्रशांत शर्मा, जिलाध्यक्ष ​हरिप्रसाद बैरवा, विधायक विकास चौधरी को शामिल किया है। जबकि भाजपा की कमेटी में प्रत्याशी चयन हेतु पूर्व प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़, मंत्री ​हीरालाल नागर, महामंत्री जितेन्द्र गौठवाल व म​हामंत्री ओमप्रकाश भडाना को शामिल किया है।

दौसा विधानसभा क्षेत्र से मुरारीलाल मीणा के सांसद बनने से खाली हुई सीट है। इस सीट पर डॉ. किरोडी लाल मीणा ने भाजपा को जिताने का अथक प्रयास किया लेकिन असफल रहे और मंत्री पद से त्याग पत्र दे दिया। त्याग पत्र स्वीकार भी नही किया गया लेकिन वे अड़े हुए है। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा वापस मीणा समाज का समर्थन प्राप्त करने का प्रयास कर रहे है लेकिन कितना समर्थन प्राप्त कर पायेगें यह वक्त ही बतायेगा। भाजपा के लिए इस सीट पर जीत पाना भी काफी कठिन है क्योकि इस सीट पर भी मीणा व गुर्जर जाति का गठबंधन मुरारीलाल मीणा व सचिन पायलट के कारण मजबुत स्थिति में है। विधानसभा उप चुनाव में प्रत्याशी चयन हेतु कांग्रेस ने कमेटी में सांसद मुरारीलाल मीणा, महा​सचिव पुष्पेन्द्र भारद्वाज, जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओड व विधायक र​फीक खान को शामिल किया है। वही भाजपा की कमेटी में प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, डॉ. किरोडीलाल मीणा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी व प्रभुलाल सैनी को दी गई है।

झुंझुनूं विधानसभा सीट बृजेन्द्र ओला के सांसद बनने के ​कारण रिक्त हुई है। इस सीट पर लम्बे समय से ओला परिवार का दबदबा रहा है। जिसके कारण भाजपा के लिए इस सीट पर राह काफी ​कठिन है वही पूर्व मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा भी चुनावी मैदान में उतरने के प्रयास में लगे है। यदि इस सीट पर त्रिको​णीय संघर्ष होता है तो भाजपा के लिए जीत पाना बहुत मुश्किल है। उप चुनाव हेतु कांग्रेस ने कमेटी गठन में सांसद बृजेन्द्र ओला, जिलाध्यक्ष दिनेश सुंडा, महासचिव रामसिंह कस्वां व विधायक मनोज मेघवाल को शामिल किया है। वही भाजपा की कमेटी में मंत्री अविनाश गहलोत, मंत्री सुमित गोदारा, महामंत्री श्रवण​ सिंह बागड़ी व विधायक गोवर्धन वर्मा को शामिल किया है।
उप चुनाव पांचों ही जगह काफी रोचक होगें क्योकि केन्द्र व राज्य में भाजपा की सरकार है वही कांग्रेस, बाप व रालोपा का क्षेत्र में अधिक प्रभाव है।

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